New Delhi News: सड़क दुर्घटना के मामलों में MACT (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने कहा है कि किसी पीड़ित के शराब पीने मात्र से उसे हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. न्यायाधिकरण ने एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को 30.77 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
2018 में ट्रक की टक्कर से हुआ था गंभीर हादसा
सचिन धवन ने अपनी याचिका में बताया कि 5 जुलाई 2018 को वह पूसा गेट के पास मोटरसाइकिल से जा रहा था. इसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी और उसे कुछ दूरी तक घसीटता हुआ ले गया. हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और उसका बाया पैर 40 प्रतिशत स्थायी रूप से विकलांग गया.
मेडिकल रिपोर्ट में मिली थी शराब की गंध
सुनवाई के दौरान सचिन की मेडिकल-लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) में उसकी सांस से शराब की गंध आने की बात सामने आई. हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया था कि उसने कितनी शराब पी थी और क्या वह कानूनी सीमा से अधिक नशे में था.
सिर्फ शराब पीना नहीं बनता लापरवाही का आधार
न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी शिरीश अग्रवाल ने कहा कि केवल शराब का सेवन करना किसी अन्य चालक को लापरवाही से वाहन चलाने का अधिकार नहीं देता. उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित द्वारा शराब पीना अपने आप में ‘सह-लापरवाही’ साबित नहीं करता .
हेलमेट और लाइसेंस न होने पर भी नहीं माना दोषी
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि सचिन लापरवाही से वाहन चला रहा था. हेलमेट न पहनना या ड्राइविंग लाइसेंस का न होना कानून का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इसे सीधे सह-लापरवाही नहीं माना जा सकता.
ट्रक चालक है लापरवाही जिम्मेदार
न्यायाधिकरण ने सबूतों के आधार पर माना कि दुर्घटना ट्रक चालक की तेज और लापरवाही ड्राइविंग के कारण हुई. इसके बाद अदालत की ओर से ट्रक ड्राइवर और मालिक को सचिन धवन को ब्याज सहित 30.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया.
