Salman Khan के घर के बाहर हुई फायरिंग में इस्तेमाल दोनों हथियार सूरत के तापी नदी से बरामद

Salman Khan के घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में पुलिस ने दोनों गन बरामद कर लिया है. दोनों हथियार सूरत के तापी नदी से बरामद किए गए हैं.

सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग मामले में मुंबई क्राइम ब्राॅन्च ने दूसरे गन को बरामद किया है. गन के साथ तीन मैगजीन भी सूरत के तापी नदी से बरामद किया गया है. सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग मामले में पहली गन कल रात को बरामद की गई थी. ज्ञात हो कि सलमान खान के घर के बाहर 14 अप्रैल को फायरिंग की गई थी. फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार की खोज में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दया नायक ने अपनी टीम के साथ सूरत के तापी नदी में सर्च शुरू किया था, जिसमें यह सफलता मिली है.

बिहार के चंपारण से हैं दोनों शूटर

सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग करने वाले दोनों शूटर को पुलिस ने गुजरात के भुज जिले से बरामद किया है. ये दोनों आरोपी बिहार के चंपारण जिले से हैं. इन्होंने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद रिवाल्वर को नदी में फेंक दिया था. दोनों शूटर ने फायरिंग से पहले गोली चलाने की प्रैक्टिस भी की थी.

सदमे में है सलमान खान का परिवार

सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग के बाद उनका पूरा परिवार सदमे में है. सलमान के भाई अरबाज खान ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि पूरा परिवार दहशत में है, लेकिन हमें मुंबई पुलिस पर पूरा भरोसा है. वहीं सलमान के जीजा आयुष ने कहा कहा कि यह परिवार के लिए मुश्किल घड़ी है. हम एक साथ हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं परेशान करती हैं. आयुष ने एएनआई न्यूज एजेंसी से बातचीत में यह बातें कहीं.


बिश्नोई बंधुओं के निर्देश पर हुई थी फायरिंग

सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग करने के मामले में बिश्नोई बंधुओं का नाम सामने आया है. इनके निर्देश पर दो आरोपियों ने सलमान खान के बांद्रा स्थित घर गैलेक्सी अपार्टमेंट पर फायरिंग की थी. फायरिंग करने वाले दोनों आरोपियों का नाम विक्की गुप्ता और सागर पाल है, जिन्होंने बिश्नोई बंधुओं के निर्देश पर घटना को अंजाम दिया था. फायरिंग की घटना के बाद अनमोल बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट लिखकर घटना की जिम्मेदारी ली थी.

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Published by: Rajneesh anand

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राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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