कोरोना के इलाज में गेम चेंजर साबित हो सकता है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, मेदांता अस्पताल के डॉ अरविंदर सिंह सोइन का दावा

कोरोना वायरस पर लगाम के लिए जहां वैक्सीनेशन पर सरकार और डॉक्टर जोर दे रहे हैं, उसी क्रम में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की चर्चा भी है. मेदांता अस्पताल के डॉक्टर डॉ अरविंदर सिंह सोइन ने कहा है कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी भारत सहित विश्व के अन्य देशों के लिए भी कोरोना पर लगाम कसने में गेम चेंजर साबित हो सकता है.

कोरोना वायरस पर लगाम के लिए जहां वैक्सीनेशन पर सरकार और डॉक्टर जोर दे रहे हैं, उसी क्रम में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की चर्चा भी है. मेदांता अस्पताल के डॉक्टर डॉ अरविंदर सिंह सोइन ने कहा है कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी भारत सहित विश्व के अन्य देशों के लिए भी कोरोना पर लगाम कसने में गेम चेंजर साबित हो सकता है.

डॉ अरविंदर का कहना है कि मोनोक्लोनल एंटी बॉडी खासकर हाई रिस्क वाले बुजुर्ग रोगियों और बच्चों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए उत्साहजनक सूचना है कि जाइडस कैडिला जल्द ही स्वदेशी रूप से विकसित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी पर परीक्षण शुरू कर सकती है.

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डॉक्टर अरविंदर सिंह सोइन ने कहा कि अमेरिका के पास अब तीन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएं हैं, जिसका फायदा उन्हें मिल रहा है हमें भी इन्हें जल्दी अपनाना चाहिए, इन्हें भारत में बड़े पैमाने पर बनाने की व्यवस्था करनी चाहिए और इन्हें कम कीमत पर उपलब्ध कराना चाहिए. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी व्हाइट ब्लड सेल से बनता है और कोरोना के इलाज में यह कारगर हो रहा है.

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की कॉकटेल दवा अमेरिका से भारत आयी है, जिसे कुछ गंभीर मरीजों को देना शुरू भी कर दिया गया है. यह दवा तब चर्चा में आयी थी जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह दवा दी गयी थी. यह दवा शरीर में कोरोना वायरस को अपना प्रसार करने के रोकती है और उसपर अंकुश लगाती है. इस दवा के प्रयोग से मरीजों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती और वे घर पर ठीक हो जाते हैं.

Posted By : Rajneesh Anand

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