विपक्ष के हंगामे को देखकर भावुक हुए सभापति वेंकैया नायडू, कहा- आसन पर फाइल फेंकना शर्मनाक

संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने जोरदार हंगामा कर दिया है. हंगामे को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. वहीं राज्यसभा में हंगामे के कारण सभापति वेंकैया नायडू के आंसू निकल गए. मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला था.

  • सदन में विपक्ष का जोरदार हंगामा

  • हंगाना देख भावुक हुए वेंकैया नायडू

  • लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

बुधवार को संसद का मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार रहा. सदन शुरू होते ही विपक्ष ने नारेबाजी के साथ हंगामा शुरू कर दिया. जिसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. हंगामा सिर्फ लोकसभा में ही नहीं बरप रहा था, राज्यसभा की दीवारें भी विपक्ष के नारों से गूंज रही थी. इस हंगामे के बीच विपक्ष ने स्पीकर के सामने फाइल फेंक दी. हंगामे को देखकर पदासीन सभापति वेंकैया नायडू भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि, आसन पर फाइल फेंकना शर्मनाक घटना है.

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने राज्सभा में जारी हंगामे पर दुख जाहिर किया. इस बीच वो भावुक भी हुए, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा. विपक्ष के सांसद नारेबाजी करते रहे. लगातार हो रहे हंगामे पर सभापति ने कहा कि, सदन में जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है. वेंकैया नायडू ने पूरे सत्र में विपक्ष के रवैये पर दुख जाहिर किया है. उन्होंने फाइल फेंकने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि, इससे सदन की गरिमा को चोट पहुंची है.

इधर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कहना है कि सदन की कार्यवाही अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. विपक्ष के लगातार हंगामें के कारण सदन की कारियवाही बाधित होती रही. सदन महज 22 प्रतिशत की काम कर पाया. इस दौरान उन्होंने बताया कि, मॉनसून सत्र में संविधान का 127वां संशोधन विधेयक सहित कुल 20 विधेयक पारित हुए हैं. बता दें, विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है.

इससे पहले कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में पेगासस जासूसी विवाद पर स्थगन प्रस्ताव नोटिस जारी किया था. उन्होंने इसपर चर्चा की मांग की थी. उनका कहना है कि विपक्ष की लगातार मांग के बावजूद सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं करा रहा है. बता दें, मॉनसून सत्र में विपक्ष पेगासस जासूसू कांड़, किसान आंदोलन, तेल और रसोई गैस के बढ़ते दामों पर चर्चा की लगातार मांग कर रहे हैं.

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Posted by: Pritish Sahay

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