DU: दिल्ली विश्वविद्यालय ने कैंपस को ड्रग फ्री बनाने के लिए नशामुक्त परिसर अभियान किया शुरू

डीयू की ओर ड्रग-फ्री कैंपस अभियान ‘नशामुक्त परिसर अभियान’ का शुभारंभ मंगलवार को किया गया. इस मौके पर उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विशिष्ट अतिथि और दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद सम्मानीय अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. इस दौरान उपराष्ट्रपति ने ड्रग-फ्री कैंपस पोर्टल और मोबाइल ऐप को लांच किया गया.

DU: दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) की ओर ड्रग-फ्री कैंपस अभियान ‘नशामुक्त परिसर अभियान’ का शुभारंभ मंगलवार को किया गया. इस मौके पर उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विशिष्ट अतिथि और दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद सम्मानीय अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. इस दौरान उपराष्ट्रपति ने ड्रग-फ्री कैंपस पोर्टल और मोबाइल ऐप को लांच किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे डीयू में पहली बार आए हैं और कई बार ऐसा होता है कि पहली यात्रा भी बहुत ही ऐतिहासिक बन जाती है. नशामुक्त कैंपस बनाने की पहल जो शुरू की जा रही है वह सबके सहयोग, कठोर परिश्रम, लगन और भावना से सिर्फ शैक्षणिक कैंपस काे ही नहीं बल्कि पूरे देश को ड्रग फ्री बनाने का काम करेगा.

विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं होता बल्कि यहां मूल्यों को आकार दिया जाता है. हमारे वेद और उपनिषद भी संयम और सात्विक जीवन पर जोर देते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकमात्र लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बनाना है और यह लक्ष्य केवल युवाओं के प्रयासों से ही संभव है. नशामुक्त युवक कौशल को आसानी से सीखकर एंट्रप्रेनयोरशिप को बढ़ावा देते हैं.

इससे देश की आर्थिक प्रगति में सहयोग देकर राष्ट्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं. ड्रग ट्रेड नार्को टेरेरिजम को बढ़ावा देता है. इस व्यापार में अत्यधिक मुनाफा तो है, लेकिन वह समाज और मानवता की कीमत पर है और इसलिए सभी को इसके खिलाफ खड़े होना जरूरी है. ड्रग फ्री युवा केवल निजी और आर्थिक विकास के लिए ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि देश की समृद्धि और स्थायित्व के लिए भी जरूरी है. 

ड्रग्स भविष्य को करता है बर्बाद


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ड्रग न तो फ्रीडम है और न ही रिबेलियन. ड्रग की आदत बिलकुल भी कूल नहीं है. इसकी आदत क्यूरियोसिटी और एक्सपेरिमेंटेशन से शुरू होती है और बाद में डिपेंडेंसी, खराब हेल्थ और भविष्य को बर्बाद कर देती है. युवाओं को ड्रग्स लेने से पहले अपने परिजनों, उनके त्याग के बारे में विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र पहले से संघर्ष कर रहा है तो उसे यह समझना चाहिए कि इससे उबरने के लिए सहायता उपलब्ध है. मदद मांगना कमजोरी नहीं, समझदारी है. काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम का उपयोग करना चाहिए ताकि रिकवरी हो सके. शिक्षा मंत्री ने डीयू को ड्रग फ्री उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के संकल्प के लिए डीयू को बधाई देते हुए कहा कि हमें ऐसा कैंपस कल्चर बनाना होगा जहां वेलबींग को प्राथमिकता मिले.

इस दिशा में डीयू को देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण बनने का काम करना चाहिए. दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कैंपस केवल डिग्री बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार हैं. डीयू की इस पहल को दिल्ली के हर स्कूल और कॉलेज में इस पहल को लागू किया जाएगा. इस मौके पर डीयू कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने डीयू के ड्रग फ्री कैंपस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि डीयू को नशा मुक्त भारत अभियान के साथ मिलकर ड्रग फ्री कैंपस बनाया जाएगा. ड्रग फ्री कैंपस छात्रों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने, अकादमिक सफलता को बढ़ावा देने और सुरक्षित लर्निंग वातावरण बनाने के लिए जरूरी है. डीयू के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट द्वारा तंबाकू छोड़ने की राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवा शुरू की गयी है. 

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Published by: Vinay tiwari

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