INS Anjadip: भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को आईएनएस अंजदीप युद्धपोत का जलावतरण किया. इस युद्धपोत का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और तटीय निगरानी को बढ़ाना है. आईएनएस अंजदीप ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट’ परियोजना के तहत बनाए जा रहे आठ पोतों में से तीसरा है. यह पोत ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना है.
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने चेन्नई बंदरगाह पर पोत का जलावतरण किया. बंदरगाह पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह के दौरान नौसेना के सीनियर ऑफिसर्स और अन्य सरकारी अधिकारी मौजूद रहे. आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 77 मीटर लंबे इस पोत में एक ‘हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम’ लगा है. इसकी वजह से यह त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति हासिल कर सकता है.
नौसेना ने कहा कि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित अंजदीप एक अत्याधुनिक युद्धपोत है. आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्वेट है. इससे पहले नौसेना में आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ को शामिल किया जा चुका है. इन स्वदेशी ASW-SWC कार्वेट्स का निर्माण नौसेना के पुराने हो चुके ‘अभय श्रेणी’ के जहाजों की जगह लेने के लिए किया जा रहा है.
आईएनएस अंजदीप की खासियत
इसे विशेष रूप से तटीय और राष्ट्र की सुरक्षा के लिहाज से अहम, उथले जल क्षेत्रों में परिचालन की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है. पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) भूमिका के अलावा यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है. यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्धक हथियारों और सेंसर पैकेज से लैस है जिसमें ‘सोनार अभय’ भी शामिल है और यह हल्के टॉरपीडो एवं पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से युक्त है.
‘अंजदीप’ का नाम कर्नाटक के कारवार तट (अरब सागर) के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है. इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा रक्षा क्षमता और मजबूत होगी.
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