AQI खराब श्रेणी में होने की वजह से दिल्ली की हवा दमघोंटू,देखें वीडियो

Delhi Pollution: दिल्ली की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है, तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदूषण का स्तर खराब से नीचे नहीं आया है. आज भी राजधानी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में AQI खराब श्रेणी में दर्ज किया गया.

Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. बुधवार सुबह भी दिल्ली में एक्यूआई (AQI) खराब श्रेणी में ही रहा है. यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी है. दिल्ली में दिवाली के बाद से ही हवा दमघोंटू हो गई है और आम आदमी परेशान है.

धुंध की परत पसरी

अक्षरधाम इलाके में बुधवार सुबह हवा में धुंध की परत छाई हुई थी और AQI 281 है, जिसे खराब श्रेणी में रखा जाता है. वहीं लोधी रोड के आसपास के इलाके में AQI 221 पाया गया और यह भी खराब कैटेगरी को ही बताता है. दमघोंटू हवा की वजह से सरकार यह प्रयास कर रही है कि प्रदूषण को कम किया जाए. इसी प्रयास के तहत दिल्ली नगर पालिका परिषद की ओर से वाहन की मदद से पानी का छिड़काव किया गया, ताकि धूल कम उड़े और हवा में प्रदूषण की मात्रा कुछ कम हो.

दिल्ली में हवा क्यों हुई है जहरीली?

दिल्ली में हर साल जाड़े की शुरुआत के साथ ही हवा जहरीली हो जाती है. इसके पीछे कई वजहें हैं. प्रदूषण का स्तर बढ़ जाने के बाद सर्दियों में हवा की गति धीमी और तापमान कम होने से प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते. इस वजह से हवा में प्रदूषण फंस जाता है और AQI तेजी से बढ़ता है. दिल्ली में वाहनों से निकलने वाला धुआं, पराली जलाने की घटना और अन्य कई वजहों से हर साल प्रदूषण का स्तर जाड़े में बहुत बढ़ जाता है, जिसकी वजह से सांस संबंधित कई बीमारियां भी होती है.

AQI स्तर (Range)वर्गीकरण (Category)रंग संकेत (Color Code)स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Impact)
0 – 50अच्छा (Good)🟢 हरावायु गुणवत्ता संतोषजनक, स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं.
51 – 100संतोषजनक (Satisfactory)🟡 हल्का हरा / पीलाकुछ संवेदनशील लोगों को असुविधा हो सकती है.
101 – 200मध्यम (Moderate)🟠 पीला / नारंगीअस्थमा, सांस या हृदय रोग वाले व्यक्तियों को कुछ समस्या .
201 – 300खराब (Poor)🔴 लालसांस लेने में कठिनाई, खांसी, गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
301 – 400बहुत खराब (Very Poor)🟣 बैंगनीफेफड़ों और हृदय पर गंभीर असर.
401 – 500गंभीर (Severe)⚫ गहरा भूरा / कालास्वस्थ लोगों में भी सांस की तकलीफ, सिरदर्द, आंखों में जलन.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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