Republic Day 2026 Parade: 77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत की फौजी ताकत के साथ-साथ जानवरों की अहम भूमिका भी खास तौर पर दिखाई जाएगी. इस परेड में पशु आधारित लॉजिस्टिक्स और प्राकृतिक रक्षा तंत्र पर खास जोर रहेगा. भारतीय सेना उन जानवरों की भूमिका दिखाएगी, जो देश के सबसे कठिन इलाकों में सैनिकों का साथ देते हैं. सेना बताएगी कि कैसे ऊँचे पहाड़ों और मुश्किल इलाकों में सेना किस तरह जानवरों पर निर्भर रहती है. जानवर कितने मजबूत और मौसम को अडॉप्ट करने में माहिर हैं. पहली बार भारतीय सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) की एक खास पशु टुकड़ी कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी. इन जानवरों को ‘साइलेंट वॉरियर्स’ कहा जाता है, क्योंकि ये उन जगहों पर काम करते हैं जहाँ मशीनें भी कई बार जवाब दे देती हैं.
रिपब्लिक डे 2026 की इस परेड में इस टुकड़ी में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर पोनी, चार ब्लैक काइट पक्षी (रैप्टर) और भारतीय नस्ल के दस आर्मी डॉग शामिल होंगे. भारतीय नस्ल के कुत्तों में मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, कोंबाई और राजापालयम नस्लें शामिल हैं. इनके अलावा पहले से ड्यूटी पर तैनात छह और प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते भी परेड का हिस्सा बनेंगे.
इन पशु टुकड़ी के साथ हिम योद्धा भी दिखाई देंगे. ये जवान बुलेटप्रूफ जैकेट, कैमरे, जीपीएस, रेडियो और मॉडर्न सर्विलांस इक्विपमेंट से लैस होंगे. इनके साथ एक ग्लेशियर एटीवी वाहन भी दिखाया जाएगा, जो बर्फीले इलाकों में काम आता है. यह पूरी पशु टुकड़ी खास तौर पर लद्दाख और सियाचिन जैसे ऊँचे और कठिन इलाकों में जानवरों की जरूरत और योगदान को दर्शाएगी.
77वीं गणतंत्र दिवस परेड इस बार कई मायनों में खास रहने वाली है. इसमें देश की संस्कृति, सेना की ताकत और नई तकनीक सबकी झलक देखने को मिलेगी. कुछ नई झलकियाँ भी पहली बार दिखेंगी, जैसे भैरव लाइट कमांडो बटालियन और RVC की पशु टुकड़ी. साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीनों सेनाओं के मिलकर काम करने की ताकत भी प्रदर्शित की जाएगी.
कर्तव्य पथ पर इस बार कुल 30 झांकियाँ निकलेंगी. ये ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर आधारित होंगी. 17 झांकियाँ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी, जैसे असम की टेराकोटा कला, मणिपुर की खेती में प्रगति और हिमाचल प्रदेश की देवभूमि पहचान. वहीं 13 झांकियाँ मंत्रालयों और सेवाओं की ओर से होंगी. भारतीय वायुसेना की ओर से पूर्व सैनिकों को समर्पित एक खास झांकी भी शामिल रहेगी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर होने वाले इस बड़े समारोह की अगुवाई करेंगी. परेड से पहले दिल्ली में, खासकर कर्तव्य पथ और रायसीना हिल इलाके में, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. परेड में सेना की युद्ध तैयारियों की झलक, बख्तरबंद गाड़ियाँ, मार्च करती टुकड़ियाँ, सैन्य बैंड और ‘ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस’ नाम की ट्राई-सर्विसेज की झांकी भी दिखाई जाएगी. यह भारत की नई सैन्य सोच, स्वदेशी रक्षा ताकत और तीनों सेनाओं के मिलकर काम करने की क्षमता को दिखाएगी.
इस बार के मुख्य अतिथि होंगे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन. परेड के बाद 26 से 31 जनवरी तक लाल किले में ‘भारत पर्व’ लगेगा. यहाँ अलग-अलग राज्यों का खाना, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई जनभागीदारी वाले आयोजन होंगे. 26 जनवरी का मुख्य कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ खत्म होगा, लेकिन गणतंत्र दिवस से जुड़े समारोहों का आखिरी बड़ा आयोजन 28 जनवरी को करियप्पा परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री की NCC रैली के साथ होगा.
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