LPG ने रुलाया, तो सहारा बना मिट्टी का तेल; केंद्र ने राज्यों को दिया 48,000 किलोलीटर केरोसिन

LPG vs Kerosene: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से देशभर में LPG रुलाने लगा है. एजेंसियों के बाहर लोग सिलेंडर के साथ नजर आ रहे हैं. इस संकट की घड़ी में एक बार फिर किरोसिन सहारा बन गया है. केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त मिट्टी का तेल दिया है.

LPG vs Kerosene: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया- केंद्र सरकार ने एलपीजी के विकल्प के रूप में राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन (मिट्टी का तेल) आवंटित किया है.

देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं

ट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया- देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है. करीब एक लाख पेट्रोल पंप में कहीं भी ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं है.

LPG का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने पर सरकार का फोकस

LPG सप्लाई को लेकर सरकार की तैयारियों के बारे में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया- घरेलू मार्केट में LPG सप्लाई और डिमांड दोनों मैनेजमेंट पर निर्भर करती है. सरकार सभी मोर्चों पर एक्शन ले रही है. हम अपने LPG का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही, जहां भी इंपोर्ट मुमकिन है, वह भी एक्टिवली हो रहा है. गैस बुकिंग का समय 21 से 25 दिन कर दिया गया है.

19 kg के सिलेंडर जारी किए जाएंगे

सुजाता शर्मा ने बताया- दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी के साथ डिटेल में बातचीत हुई है. यह तय हुआ है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कुछ कमर्शियल सिलेंडर, 19 kg के सिलेंडर भी जारी करेंगी. लेकिन इसके लिए राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका बहुत जरूरी है. ताकी यह पक्का हो सके कि डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसपेरेंट तरीके से, प्रायोरिटी के हिसाब से हो.

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By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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