Loksabha Deputy Speaker: कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने रविवार को लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली रहने को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में यह पद पिछले सात सालों से नहीं भरा गया है. टैगोर ने कहा कि यह कोई छोटी प्रक्रियात्मक चूक नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार करता है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टैगोर ने कहा कि संविधान साफ तौर पर कहता है कि सदन को स्पीकर और डिप्टी स्पीकर, दोनों का चुनाव करना होता है. इसमें कोई ‘हो सकता है’ जैसी गुंजाइश नहीं है, बल्कि यह एक जरूरी जिम्मेदारी है. इसके बावजूद मौजूदा सरकार ने डिप्टी स्पीकर का पद खाली छोड़ा हुआ है, जो संवैधानिक भावना के खिलाफ है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, यहां शब्द ‘may’ नहीं है, बल्कि ‘shall’ है. इसके बावजूद नरेंद्र मोदी की सरकार में डिप्टी स्पीकर की कुर्सी खाली है. क्यों? टैगोर ने आगे बताया कि परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि क्योंकि परंपरा यह कहती है कि डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दिया जाता है, ताकि संतुलन बना रहे, निष्पक्षता सुनिश्चित हो और लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान हो. विपक्ष को उसकी जायज जगह से वंचित करना खुद संस्था को कमजोर करता है. अब, जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, तो डिप्टी स्पीकर का न होना इस जानबूझकर खाली रखे गए पद को और भी साफ तौर पर उजागर करता है.
क्या यही सुशासन है? या यह जवाबदेही का डर है? विपक्ष को हाशिये पर रखने के लिए संवैधानिक पदों को खाली रखना ताकत नहीं, बल्कि असुरक्षा की निशानी है. उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति या एक पार्टी के बारे में नहीं होता. यह संविधान का उसके अक्षर और उसकी भावना, दोनों के साथ सम्मान करने के बारे में होता है.
टैगोर का मानना है कि यह परंपरा संसद की कार्यवाही में संतुलन, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मानदंडों के सम्मान को सुनिश्चित करती है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के संदर्भ में उन्होंने सरकार पर डिप्टी स्पीकर का पद ‘जानबूझकर’ खाली रखने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या यह जवाबदेही के डर की वजह से है.
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में कांग्रेस के सांसदों ने हाल ही में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. कांग्रेस का आरोप है कि स्पीकर का आचरण ‘खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण’ रहा है और वे विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने से रोकते रहे हैं.
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