Children Safety: कठोर कानून ही नहीं जागरूकता पर भी है सरकार का फोकस

देश में बच्चों से जुड़े अपराध के लिए पोक्सो और फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन हुआ है जिसमें कठोर दंड का प्रावधान किया गया है. सरकार कठोर दंड के साथ ही जागरूकता फैलाने की दिशा में भी काम कर रही है. जनवरी 2025 तक 30 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 404 विशेष पोक्सो अदालतों सहित 754 एफटीएससी कार्यरत हैं. इन अदालतों में 306000 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है.

Children Safety: बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए है. बच्चों को यौन शोषण और यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम 2012 लागू किया है. इस कानून के तहत 18 साल से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को बच्चा माना गया है. बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों के लिए मृत्युदंड सहित अधिक कठोर सजा का प्रावधान करने के लिए 2019 में अधिनियम में संशोधन किया गया था, ताकि अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जा सके.

इस कानून की धारा 4 के तहत “पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट” के लिए न्यूनतम 20 साल के कठोर सजा का प्रावधान है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है. धारा 8 में यौन उत्पीड़न के दोषी पाए जाने वालों के लिए न्यूनतम तीन से पांच साल के कारावास का प्रावधान है, जबकि धारा 10 में गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए इसे न्यूनतम पांच साल तक बढ़ाया गया है. लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी दी. 

पुलिस सत्यापन और पृष्ठभूमि की जांच भी जरूरी

अधिनियम की धारा 14 में पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए बच्चों का उपयोग करने पर सात साल तक के कारावास का प्रावधान है. कानून की धारा 28 के तहत त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन करने का प्रावधान है. इसके अलावा बच्चों को शोषण, हिंसा और यौन शोषण से बचाने के लिए पोक्सो नियमावली, 2020 को भी अधिसूचित किया गया है. नियम 3 में प्रावधान है कि बच्चों को रखने वाली या बच्चों के नियमित संपर्क में आने वाली कोई भी संस्था को समय-समय पर हर कर्मचारी, शिक्षण या गैर-शिक्षण, नियमित या संविदा, या ऐसे संस्थान का कोई अन्य कर्मचारी जो बच्चे के संपर्क में आता है उसका पुलिस सत्यापन और पृष्ठभूमि की जांच करें. इसमें स्कूल, क्रेच, खेल अकादमी या बच्चों के लिए कोई अन्य सुविधा शामिल है. ऐसी संस्था को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के बारे में उन्हें संवेदनशील बनाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाए.



पोक्सो के लिए विशेष अदालतों का गठन जरूरी


बलात्कार और पोक्सो से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई और निपटान के लिए विशेष पोक्सो अदालतों सहित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की स्थापना के लिए एक योजना कानून मंत्रालय चला रहा है. मौजूदा समय में 31 जनवरी 2025 तक 30 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में 404 विशेष पोक्सो अदालतों सहित 754 एफटीएससी कार्यरत हैं. इन अदालतों में 306000 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इसके अलावा सरकार ने समय-समय पर इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया, परामर्श, कार्यशालाओं और संबंधित हितधारकों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए काम कर रहा है. 


पोक्सो अधिनियम के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए देश भर के सिनेमा हॉल और दूरदर्शन में एक लघु फिल्म का प्रसारण किया. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने चाइल्ड लाइन 1098 प्रकाशित की है, जो बच्चों के लिए 24x7x365 टोल फ्री हेल्पलाइन है और बच्चों को सुरक्षा, शिकायत और आपातकालीन पहुंच के संभावित तरीकों के बारे में जानकारी से लैस करने के लिए कक्षा 6वीं से कक्षा 12वीं तक की सभी पाठ्य पुस्तकों के सामने के कवर के पीछे पोक्सो ई-बॉक्स है. 

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