आखिरी हिंदू नेता ने छोड़ी पार्टी, पांच साल में कांग्रेस कार्यालय से होगी अजान; CM हिमंता का भूपेन बोरा के इस्तीफे पर कटाक्ष

Assam News: असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तीखा तंज कसा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस से आखिरी हिंदू ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने बोरा को बीजेपी जॉइन करने का ऑफर भी दिया है. हिमंता ने कहा कि आने वाले 5 साल में कांग्रेस कार्यालय से अजान दी जाएगी.

Assam News: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा कटाक्ष किया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि असम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का भविष्य बेहद निराशाजनक है. यह टिप्पणी उन्होंने असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी से इस्तीफे के बाद की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दरवाजे उनके लिए खुले हैं.

मुख्यमंत्री ने बोरा के फैसले को प्रतीकात्मक संदेश बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस के भीतर बदलते हालात और आंतरिक चुनौतियों को दर्शाता है. पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘भूपेन बोरा असम कांग्रेस में आखिरी हिंदू नेता थे, जो न तो विधायक थे और न ही मंत्री. उनका इस्तीफा इस बात का प्रतीक है कि कांग्रेस में सामान्य परिवार से आने वाले व्यक्ति के लिए आगे बढ़ना मुश्किल है. उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है. मैं उनके इस्तीफे का स्वागत करता हूं.’

अपने इस्तीफे पर क्या बोले बोरा?

बोरा ने मंगलवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा भेजा, जिससे असम विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है. बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे. पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई. वह असम में दो बार 2006 से 2016 तक बिहपुरिया सीट से विधायक रह चुके हैं.

हिमंता ने सुरक्षित सीट से लड़ाने का दिया ऑफर

हिंमता ने कहा, ‘भूपेन बोरा ने हमारे साथ किसी भी तरह के शामिल होने को लेकर संपर्क नहीं किया है. कल शाम मैं उनके घर जाऊंगा. तीन साल पहले भी हम भूपेन बोरा का स्वागत करने और उन्हें सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे.’ वहीं भूपेन बोरा ने भी बीजेपी जॉइन करने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है. 

इस्तीफे की टाइमिंग काफी अहम

उन्होंने खड़गे को दिए गए इस्तीफे में लिखा कि पार्टी को 32 साल देने के बाद अलविदा कह रहे हैं. लेकिन उनका इरादा राजनीति से संन्यास लेने का नहीं है. बोरा ने कांग्रेस ऐसे समय में छोड़ी है, जब पार्टी राज्य में ‘बदलाव की यात्रा’ शुरू कर रही है. बोरा इसमें गौरव गोगोई के साथ हिस्सा भी ले रहे थे. 

उनके इस्तीफे का समय इसलिए भी काफी अहम है, क्योंकि 18 फरवरी को प्रियंका गांधी असम के टूर पर रहेंगी और पार्टी की मजबूती को परखेंगी. वह इस साल होने वाले विधान सभा चुनाव में टिकट बांटने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा असम की रोंगानोडी सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे.

हिमंता ने कांग्रेस पर जमकर किया हमला

उनके इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, ‘मुझे याद है कि हम दोनों लगभग एक ही समय में कांग्रेस में शामिल हुए थे. मैंने 22 साल बाद पार्टी छोड़ी और वे मुझसे कुछ ज्यादा समय तक पार्टी में रहे.’ शर्मा ने यह भी दावा किया कि बोरा ने अपने इस्तीफे में कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त होने का आरोप लगाया और यह भी उल्लेख किया कि ‘गौरव गोगोई अपनी पाकिस्तान यात्रा पर उचित स्पष्टीकरण नहीं दे सके.’

असम में कांग्रेस की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ‘असम में कांग्रेस की हालत बेहद खराब है. उम्मीदवारों के चयन के लिए यहां तीन पर्यवेक्षक आए हैं. उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय से एक विधायक सौंपा गया है. स्थिति वाकई गंभीर है. असम में कांग्रेस के कई जिला कार्यालयों में बैठकों की शुरुआत एक खास समुदाय की धार्मिक प्रार्थना से होती है. असम की कांग्रेस तेजी से बदल रही है और लोग इसे देख भी रहे हैं. भूपेन बोरा का इस्तीफा इस बात का प्रतीक है कि कांग्रेस ने अपना आखिरी हिंदू नेता भी खो दिया है.”

आने वाले समय में कांग्रेस से और इस्तीफे होंगे- हिमंता

भारतीय जनता पार्टी में नए नेताओं के शामिल होने की संभावना पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘किसी को भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल कराने के लिए हमें पार्टी के भीतर काफी संतुलन बनाना पड़ता है, क्योंकि हमारे पास खाली सीटें नहीं हैं. जिन सीटों पर हिंदू, भारतीय या भारतीय मुस्लिम जीत सकते हैं, वे पहले से भरी हुई हैं. मैं यह अनुमान लगा सकता हूं कि कांग्रेस से लोग इस्तीफा देंगे, चाहे वे बीजेपी में शामिल हों या नहीं. गौरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक के बाद जमीनी स्तर पर कांग्रेस के कई हिंदू नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. 10-15 दिनों बाद 4-5 विधायक भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल हम उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा का चुनाव बाकी है.’

5 साल के भीतर कांग्रेस कार्यालय से होगी अजान

सरमा ने दावा किया कि बोरा के इस्तीफ में, ‘मैंने दो बिंदु देखे हैं – एक यह कि धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन अब कांग्रेस को नियंत्रित कर रहे हैं. इसका कारण यह है कि अगले चुनावों में गौरव गोगोई जोरहाट संसदीय क्षेत्र से नहीं, बल्कि नागांव से चुनाव लड़ेंगे, जिसके लिए उन्हें हुसैन की आवश्यकता होगी. दूसरा- नागांव के सांसद प्रद्युत बोरा 2029 में कांग्रेस छोड़ देंगे, जबकि असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया अपनी नाजिरा सीट हार जाएंगे. शर्मा ने यह भी दावा किया कि पांच साल के भीतर, ‘कांग्रेस कार्यालय से ‘अजान’ दी जाएगी.’ पार्टी में केवल वही हिंदू रहेंगे जिनके पिता या माता मंत्री या विधायक रहे हों….’

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By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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