डेविड हेडली का खुलासा, ISI के लिए भी किया था काम, पाक सेना अधिकारियों से भी मिला था
मुंबई : मुंबई की एक अदालत के समक्ष आज लगातार दूसरे दिन गवाही देते हुए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा ने यहां ताज होटल में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों पर हमला बोलने की योजना बनायी थी. हेडली ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई ने उसे कहा था […]
मुंबई : मुंबई की एक अदालत के समक्ष आज लगातार दूसरे दिन गवाही देते हुए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा ने यहां ताज होटल में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों पर हमला बोलने की योजना बनायी थी. हेडली ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई ने उसे कहा था कि वह उनके लिए जासूसी करने के लिए भारतीय सैन्यकर्मियों को नियुक्त करे. हेडली ने कहा कि भारत में आतंकी हमलों के लिए मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा जिम्मेदार है और यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सभी आदेश इसके शीर्ष कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी की ओर से आए. खुलासे जारी रखते हुए हेडली ने कहा, ‘मैं वर्ष 2006 की शुरुआत में आईएसआई के मेजर इकबाल से लाहौर में मिला था. डेविड हेडली ने बताया कि वह आईएसआई के लिए भी काम करता था और कई पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों से भी मिलता रहा था. हेडली ने कहा कि आईएसआई और लश्कर ए तैयबा का संबंध है. दोनों मिलकर काम करते हैं. हाफिज सईद ने लखवी को मुंबई हमले का कमांडर बनाया था.
आईएसआई अधिकारी ने भारतीय सेना में जासूस बनाने को कहा
उन्होंने मुझे भारत की खुफिया सैन्य जानकारी एकत्र करने के लिए कहा था. उन्होंने मुझे जासूसी के लिए भारतीय सेना से भी किसी को नियुक्त करने के लिए कहा था. मैंने मेजर इकबाल से कहा था, मैं उनके कहे मुताबिक काम करुंगा.’ हेडली ने अदालत को बताया, ‘मैं इस अदालत को यह नहीं बता सकता कि लश्कर-ए-तैयबा के किस व्यक्ति विशेष ने भारत में आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के निर्देश दिए. पूरा समूह ही जिम्मेदार था. हालांकि हम यह कयास लगा सकते हैं कि चूंकि लश्कर के अभियानों का प्रमुख जकी-उर-रहमान था, ऐसे में तार्किक तौर पर सभी आदेश उसी की ओर से आए होंगे.’
भारतीय रक्षा वैज्ञानिक थे ताज हमले में निशाने पर
हेडली ने यह भी कहा, ‘वर्ष 2007 के नवंबर और दिसंबर में लश्कर-ए-तैयबा ने मुजफ्फराबाद में एक बैठक की थी, जिसमें (संगठन में हेडली के आका) साजिद मीर और किसी अबु काहसा ने शिरकत की था. इस बैठक में यह तय हुआ था कि आतंकी हमले मुंबई पर बोले जाएंगे.’ हेडली ने कहा, ‘मुंबई के ताज होटल की रेकी का काम मुझे सौंपा गया था. उनके (साजिद और कहासा) पास जानकारी थी कि ताज होटल के सम्मेलन कक्ष में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की बैठक होने वाली है. वे लोग उसी समय हमले की योजना बनाना चाहते थे.’ उसने कहा, ‘उन लोगों ने ताज होटल का एक प्रतिरुप (डमी) भी बनाया था. हालांकि वैज्ञानिकों की बैठक रद्द हो गयी थी.’
2007 से पहले हमले की रुप रेखा तैयार नहीं थी
हेडली ने कहा कि नवंबर 2007 से पहले, यह तय नहीं था कि भारत में आतंकी कृत्यों को किस स्थान पर अंजाम दिया जाएगा. इस मामले में सरकारी गवाह बन चुके 55 वर्षीय हेडली ने आगे कहा कि उसने ‘लश्कर के नेताओं हाफिज साहब और जकी-उर-रहमान ‘साहब’ के साथ इस बात पर चर्चा की थी कि लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने और इसे प्रतिबंधित करने के अमेरिकी सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देना अच्छा रहेगा.’ हेडली ने कहा, ‘हाफिज ने कहा कि यह अच्छा ख्याल है लेकिन उन्होंने इस पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा. जकी को लगा कि यह एक लंबी प्रक्रिया होगी और पाकिस्तानी सरकार की आईएसआई जैसी कई एजेंसियों को इसमें शामिल होना पडेगा.’
मुंबई हमलों में अपनी भूमिका के चलते अमेरिका में 35 साल कारावास की सजा काट रहे हेडली ने यह भी कहा कि उसकी पत्नी ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसके संबंधों की शिकायत पुलिस में कर दी थी. हेडली ने कहा, ‘दिसंबर 2007 में, मेरी पत्नी फैजा ने लाहौर की रेसकोर्स पुलिस के पास यह शिकायत दर्ज करायी थी कि मैंने उससे धन ठगा है.’ हेडली ने कहा, ‘जनवरी 2008 में, उसने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में शिकायत दर्ज करायी कि मैं आतंकी गतिविधियों में लिप्त हूं और लश्कर-ए-तैयबा से जुडा हुआ हूं.’ उसने कहा, ‘बाद में जब मैंने उससे इस शिकायत के बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि ‘ऐसा लगता है कि अमेरिकी अधिकारियों को उस पर यकीन हो गया है.’ ‘हेडली ने कल अपनी पहली गवाही में अदालत को बताया था कि पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में 26/11 के हमलों से पहले दो बार हमले करने की कोशिश की थी लेकिन दोनों बार प्रयास विफल रहे. 26/11 के हमलों में 166 लोग मारे गये थे. खुद को ‘लश्कर-ए-तैयबा का कट्टर समर्थक’ बताते हुए हेडली ने विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम द्वारा की जा रही जिरह में यह भी माना कि वह आतंकी संगठन के संस्थापक हाफिज सईद के भाषणों से ‘प्रभावित और प्रेरित होकर’ लश्कर से जुडा था.
सोमवार को हेडली ने किये अहम खुलासे
आईएसआई के अधिकारी भी थे हमले की साजिश में शामिल
पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने साल 2008 के मुंबई हमले की पूरी साजिश से सोमवार को पर्दा उठाया और अदालत को यह बताया किस तरह पाकिस्तान सरजमीं पर साजिश रची गयी और दो नाकाम कोशिशों के बाद 10 आतंकवादियों ने इस शहर में आतंक का खेल खेला. यही नहीं, इस पूरी साजिश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के तीन अधिकारियों की प्रत्यक्ष भूमिका थी. मुंबई हमले में अपनी भूमिका को लेकर अमेरिका में फिलहाल 35 साल की सजा काट रहे हेडली ने विशेष न्यायाधीश जीए सनप के समक्ष वीडियो लिंक के जरिए करीब साढे पांच घंटे की गवाही के दौरान 26 नवंबर, 2008 के मुंबई हमलों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया. इस 55 वर्षीय आतंकी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर तथा ऐबटाबाद में ‘हाफिज सईद साहब’ के अधीन लश्कर-ए-तैयबा की ओर से खुद को मिले प्रशिक्षण तथा लश्कर कमांडर जकीउर रहमान लखवी के बारे में बात की तथा यह भी बताया कि वह किस तरह से आईएसआई के तीन अधिकारियों, मेजर अली, मेजर इकबाल और मेजर अब्दुल रहमान पाशा के संपर्क में आया था.
26/11 से पहले भी दो बार हमले की नाकाम कोशिश की गयी
हेडली ने अदालत को बताया कि लश्कर कमांडरों एवं आईएसआई अधिकारियों के हुक्म पर उसने अपना असली नाम दाउद गिलानी बदल लिया ताकि हमले के लिए भारत में प्रमुख स्थलों की टोह ले सके जो उसके लिए ‘साहस भरा’ काम था. उसने यह भी खुलासा किया कि मुंबई में 26 नवंबर, 2008 की रात मुंबई के कई अहम स्थानों पर आतंक का खेल खेलने वाले 10 आतंकवादियों ने सितंबर और अक्तूबर के महीने में दो बार मुंबई पर हमले की योजना बनाई थी, लेकिन उनके मंसूबे नाकाम रहे थे. एक मौके पर उनकी नौका समुद्र में चट्टान से टकरा गई थी जिस वजह से उनके सभी हथियार एवं गोला-बारुद नष्ट हो गये थे और ऐसे में उन्हें वापस लौटना पडा था. हेडली गवाही में कहा, ‘मैं भारत को अपने दुश्मन के तौर पर देखता था. हाफिज सईद और लश्कर के सदस्य जकीउर रहमान लखवी भी भारत को अपना दुश्मन मानते थे.’ खुद को लश्कर का ‘सच्चा अनुयायी’ बताते हुए हेडली ने कहा कि उसने वर्ष 2002 में मुजफ्फराबाद में पहली बार ‘प्रशिक्षण’ प्राप्त किया था तथा उसने ‘नेतृत्व संबंधी पाठ्यक्रम’ में भाग लिया था जिसकी नुमाइंदगी सईद और लखवी ने की थी. उसने कहा कि वह लश्कर के शिविरों में 5-6 प्रशिक्षणों में हिस्सा लिया.
कश्मीर के मुजफ्फराबाद में लिया था आतंकी ट्रेनिंग
हेडली ने कहा, ‘दौरा-ए-सफा अध्ययन पाठ्यक्रम है और इसका आयोजन लाहौर के मुरिदके में होता है जबकि ‘दौरा-ए-आम’ शुरुआती सैन्य प्रशिक्षण है जिसका आयोजन ‘आजाद कश्मीर’ के मुजफ्फराबाद में होता है.’ लश्कर के आतंकी ने कहा कि ‘दौरा-ए-खास’ के दौरान उसे हथियारे चलाने, विस्फोटों एवं गोला-बारुद के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया. उसने कहा कि उसे खुफिया प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘दौरा-ए-रिबात’ में भी हिस्सा लिया। इसका केंद्र ऐबटाबाद से 40 मील दूर मनसेरा में था. हेडली ने कहा कि वह भारतीय सैनिकों से लडने के लिए कश्मीर जाना चाहता था लेकिन उसे बताया गया कि इस काम के लिए वह ‘बहुत उम्रदराज’ है. उसने कहा, ‘लखवी ने मुझसे कहा कि वे मुझे किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल करेंगे.’ पहली बार भारत की अपनी यात्रा के बारे में हेडली ने कहा, ‘पहले दौरे से पूर्व साजिद मीर ने मुझे निर्देश दिया कि मुंबई में जगहों का वीडियो बनाउं.’ साजिद मीर भी इस मामले में एक आरोपी है. हेडली ने कहा कि वह 2008 के आतंकी हमले से पहले सात बार मुंबई आया और हमले के बाद एक बार मार्च, 2009 में दिल्ली गया था.
