Tribal: आदिवासी क्षेत्र में रोग निवारण का काम करने वालों के लिए होगा राष्ट्रीय कार्यक्रम

केंद्रीय जनजातीय मामलों का मंत्रालय जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए जनजातीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों के लिए देश का पहला राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करेगा. इसका मकसद जनजातीय और स्वदेशी तरीके से उपचार करने वालों को सामुदायिक-स्तरीय भागीदारों के रूप में मान्यता देना, सक्षम बनाना और एकीकृत कर देश के स्वास्थ्य इकोसिस्टम से जोड़ना है.

By Vinay Tiwari | January 15, 2026 7:26 PM

Tribal: जनजातीय समुदायों के समग्र, समान और सांस्कृतिक विकास के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है. इस कड़ी में केंद्रीय जनजातीय मामलों का मंत्रालय 16-17 जनवरी को हैदराबाद में जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए जनजातीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वालों के लिए देश का पहला राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करेगा. इसका मकसद जनजातीय और स्वदेशी तरीके से उपचार करने वालों को सामुदायिक-स्तरीय भागीदारों के रूप में मान्यता देना, सक्षम बनाना और एकीकृत कर देश के स्वास्थ्य इकोसिस्टम से जोड़ना है. ताकि आदिवासी समुदाय को बेहतर चिकित्सा सेवा का लाभ मिल सके.


इस कार्यक्रम में जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम, राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा और भागीदार मंत्रालयों और संस्थानों के अधिकारी शामिल होंगे. इस दौरान जनजातीय मंत्रालय और आईसीएमआर-क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी), भुवनेश्वर के बीच प्रोजेक्ट दृष्टि के तहत एक समझौता होगा और समझौते के तहत देश में पहला राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला-भारत जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला का गठन किया जायेगा. सरकार का मानना है कि इससे जनजातीय जिलों में जनजाति-विशिष्ट स्वास्थ्य निगरानी, अनुसंधान और अनुसंधान-संचारित रोग उन्मूलन पहलों को संस्थागत देने में मदद मिलेगी. साथ ही जनजातीय-विशिष्ट स्वास्थ्य डेटा, विश्लेषण और नीतिगत साक्ष्य में एक लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने में मदद मिलेगी. 

 जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा को मिलेगी मजबूती

जनजातीय मंत्रालय के मुताबिक पिछले कुछ सालों में मंत्रालय ने जनजातीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक प्रमुख नोडल मंत्रालय के तौर पर प्राथमिकता के आधार पर नेशनल सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, टीबी, कुष्ठ रोग और मलेरिया के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ तालमेल, जनजातीय क्षेत्रों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, पीएम-जन मन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजना को लागू करने का काम किया है. राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, एम्स दिल्ली और जोधपुर, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ शामिल होंगे और ये विशेषज्ञ आदिवासी उपचार करने वालों के साथ संवाद करेंगे. ताकि वैश्विक साक्ष्य, राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथा और वैज्ञानिक सटीकता को जनजातीय चिकित्सकों के साथ साझा किया जा सके. 


समझौते के तहत एक सुरक्षित डिजिटल जनजातीय स्वास्थ्य निगरानी मंच का विकास होगा, जिसमें डैशबोर्ड, जीआईएस-सक्षम एनालिटिक्स और जनजातीय स्वास्थ्य परिणाम शामिल होंगे. यह पहल भारत जनजातीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के साथ रोग-आधारित अनुसंधान को मजबूत करने का काम करेगा. इस पहल का मकसद जनजाति के पारंपरिक ज्ञान को और आधुनिक स्वास्थ्य फ्रेमवर्क के बीच सामंजस्य स्थापित करना है.