जनकपुरी का मामला 1 नवंबर 1984 को दो सिखों सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से जुड़ा था. वहीं विकासपुरी का मामला 2 नवंबर 1984 को गुरचरण सिंह को जिंदा जलाए जाने से संबंधित था.
केंद्र सरकार ने बनाई थी SIT
इन मामलों की जांच केंद्र सरकार दने SIT बनाई थी. लंबी सुनवाई के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने सज्जन कुमार को दोषी नहीं माना. कोर्ट का डीटेल फैसला अभी जारी किया जाना बाकी है. कोर्ट ने इस मामले में 22 जनवरी को फैसला सुरक्षित रखा था. इससे पहले साल 2023 में ही सज्जन कुमार को हत्या के आरोपों से राहत मिल चुकी थी.
कोर्ट ने क्या कहा ?
7 जुलाई को कोर्ट में दिए अपने बयान में सज्जन कुमार ने कहा था कि दंगों के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे और उन्हें जानबूझकर झूठा फंसाया गया है. सरकार की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर मनीष रावत ने कोर्ट में पक्ष रखा, जबकि सज्जन कुमार की ओर से वकील अनिल कुमार शर्मा, अपूर्व शर्मा और एस.ए. हाशमी ने दलीलें दीं.
तय हुए थे आरोप
इससे पहले कोर्ट ने सज्जन कुमार पर दंगा करने, भीड़ का हिस्सा होने, धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने, आगजनी, मारपीट और लूटपाट जैसी कई धाराओं में आरोप तय किए थे. कोर्ट का मानना था कि 1 नवंबर 1984 को नवादा के गुलाब बाग इलाके में गुरुद्वारे के पास सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी, जो डंडों, लोहे की रॉड और पत्थरों से लैस थी.
कोर्ट ने कहा था कि इस भीड़ का मकसद गुरुद्वारे और सिखों के घरों को जलाना, तोड़फोड़ करना और इंदिरा गांधी की हत्या का बदला लेना था, और सज्जन कुमार भी उस भीड़ का हिस्सा थे. हालांकि, 2 नवंबर 1984 की घटना से जुड़े हत्या और गंभीर चोट के मामलों में कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सज्जन कुमार को पहले ही बरी कर दिया था. अब ताजा फैसले में कोर्ट ने दोनों मामलों में सज्जन कुमार को राहत देते हुए बरी कर दिया है.