टाली बिशनपुर में पानी पहुंचा, तो टाली झरना के विकास की भी जगी आस

Lakhisari News : पानी की समस्या खत्म हुई तो अब विकास की बारी. टाली बिशनपुर और टाली कोड़ासी गांवों में पेयजल संकट दूर होने के बाद ग्रामीणों की नजर अब अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर टाली झरना के विकास पर टिक गई है.

कजरा (लखीसराय) से सुनील कुमार की रिपोर्ट

Lakhisari News : मदनपुर पंचायत अंतर्गत आदिवासी बहुल गांव टाली बिशनपुर और टाली कोड़ासी में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान के बाद ग्रामीणों में विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है. जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के निर्देश पर बोरिंग कराकर नल-जल और चापाकल की व्यवस्था बहाल की गई, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल मिलना शुरू हो गया है. इसी सफलता से उत्साहित ग्रामीण अब टाली झरना के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की मांग उठा रहे हैं.

डीएम की पहल से बदली गांव की तस्वीर

ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन ने जिस तेजी से पेयजल संकट का समाधान किया है, उसने लोगों का भरोसा बढ़ाया है. डीएम के निर्देश पर कुछ ही दिनों में पानी की व्यवस्था बहाल कर दी गई, जिससे ग्रामीणों के जीवन में राहत आई है. अब इसी तर्ज पर टाली झरना के विकास की उम्मीद भी मजबूत हो गई है.

टाली झरना, क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान

टाली झरना सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान माना जाता है. पहाड़ों के बीच स्थित यह झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सालभर बहने वाले शुद्ध जल के कारण प्रसिद्ध है. सर्दियों में यहां का पानी गुनगुना महसूस होता है, जिसे लोग औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं. यही कारण है कि छुट्टियों और रविवार के दिन यहां पर्यटकों की भीड़ देखने को मिलती है.

सुविधाओं के अभाव में नहीं हो सका विकास

ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस स्थल का दौरा करते रहे हैं. पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण के आश्वासन भी दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हो सका. सड़क, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह प्राकृतिक स्थल अपनी पूरी क्षमता के अनुसार विकसित नहीं हो पाया है.

पर्यटन स्थल बनने की है पूरी संभावना

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि टाली झरना क्षेत्र में सड़क, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, सुरक्षा और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह स्थल लखीसराय ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है. इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे.

दशकों पुरानी मांग फिर हुई तेज

ग्रामीणों ने कहा कि जिस तरह पेयजल समस्या का त्वरित समाधान हुआ है, उसी तरह टाली झरना के विकास की दिशा में भी ठोस कदम उठाया जाना चाहिए. यह मांग दशकों से लंबित है, लेकिन अब हालात बदलने की उम्मीद जगी है.

विकास की नयी राह पर आदिवासी क्षेत्र

टाली बिशनपुर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था बहाल होने के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है. लोगों को उम्मीद है कि अब टाली झरना भी जल्द एक विकसित पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान हासिल करेगा और क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >