गर्भवतियों की एएनसी जांच नहीं, एमसीएच पर बढ़ा दबाव

गर्भवतियों की एएनसी जांच नहीं, एमसीएच पर बढ़ा दबाव वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले के पीएचसी में गर्भवतियों की एएनसी जांच नहीं हो रही है. हालात यह हैं कि जांच कराने

गर्भवतियों की एएनसी जांच नहीं, एमसीएच पर बढ़ा दबाव वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले के पीएचसी में गर्भवतियों की एएनसी जांच नहीं हो रही है. हालात यह हैं कि जांच कराने के लिए महिलाएं एमसीएच पहुंच रही हैं. सोमवार को एमसीएच में एएनसी जांच कराने वाली महिलाओं की भारी भीड़ रही. महिलाओं ने बताया कि पीएचसी में जांच की सुविधा नहीं मिलने से उन्हें मजबूरन एमसीएच आना पड़ता है. इससे समय और पैसा दोनों की बर्बादी हो रही है. चिकित्सकों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए एएनसी (एंटीनेटल केयर) जांच बेहद जरूरी है. इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं की पहचान समय रहते हो जाती है. जांच के माध्यम से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और सीवियर एनीमिया जैसे मामलों का पता लगाया जा सकता है. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि रेखा ने कहा कि यदि किसी गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन सात या उससे कम है तो उसे सीवियर एनीमिक माना जाता है. उन्होंने बताया कि सही समय पर एएनसी जांच से मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है. डॉ. रश्मि ने कहा कि जांच के जरिये गर्भावस्था की गंभीर जटिलताओं को समय रहते दूर किया जा सकता है. इससे मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है. जिले के सभी अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत हर महीने एएनसी जांच की व्यवस्था है. इस दौरान गर्भवती महिलाओं की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, एचबी प्रतिशत, एचआईवी, सिफलिस, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की जांच की जाती है.

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By Kumar dipu

स्वास्थ्य, राजनीति, समाज और समसामयिक विषयों पर दीपू रिपोर्टिंग करते हैं. इन्हें पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव है.

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