कोढ़ा प्रखंड में केले की खेती करने वाले किसान आज भी इस पारंपरिक फसल को बचाये रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. वर्षों से केले की फसलों में कई प्रकार की बीमारियों का प्रकोप जारी है. उत्पादन लगातार घट रहा है. किसान हार नहीं मान रहे हैं. दवाओं के सहारे खेती को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि पहले जहां एक बीघे खेत से अच्छी-खासी पैदावार होती थी. बीमारियों की वजह से उपज में आधे से भी अधिक की कमी देखी जा रही है. फसल को बचाने के लिए किसान नियमित रूप से बाजार से दवाइयां खरीदकर छिड़काव कर रहे हैं. इस समय किसानों को केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति और रोग प्रतिरोधक किस्मों का इस्तेमाल करना होगा. साथ ही मिट्टी की जांच और उचित कृषि तकनीक अपनाना जरूरी है.
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