भागलपुर से आरफीन जुबैर की खबर
जिले के छह नये राजकीय डिग्री कॉलेजों में एक जुलाई से पठन-पाठन शुरू होगा. इसकी तैयारी को लेकर जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इसमें निर्धारित समय-सीमा के भीतर उन कॉलेजों में आवश्यक आधारभूत संरचना, फर्नीचर एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा की गयी. कहा कि पीरपैंती, गोराडीह, खरीक, रंगराचौक, इस्माइलपुर व गोपालपुर प्रखंड में नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों का संचालन प्रारंभ किया जाना है. संबंधित क्षेत्रों के प्लस-टू विद्यालयों व अन्य उपयुक्त भवनों में चार से पांच कमरों का चयन किया गया है. जहां प्रारंभिक चरण में कक्षाओं का संचालन होना है. बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम, जिला योजना पदाधिकारी मोनू कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा, वरीय कोषागार पदाधिकारी देवेन्द्र प्रसाद, टीएमबीयू के रजिस्ट्रार के प्रतिनिधि डीएसडब्ल्यू प्रो अर्चना साह सहित डिग्री कॉलेजों के प्रभारी प्राचार्य आदि मौजूद थे.चयनित कमरों की मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा करने का निदेश
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि चयनित कमरों की मरम्मत कार्य शीघ्र कराये. साथ ही आवश्यक सिविल कार्य, फर्श, खिड़की व अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के माध्यम से शीघ्र पूरा करे.
15 जून तक निविदा प्रक्रिया करे पूर्ण
जिलाधिकारी ने कहा कि सभी छह कॉलेजों के लिए बेंच-डेस्क, टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर एवं अन्य आवश्यक उपस्कर की खरीद के लिए एक अल्पकालीन निविदा आमंत्रित की जायेगी, ताकि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं दरों में एकरूपता बनी रहे. निर्देश दिया कि 15 जून तक निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ले. 18 जून तक सभी कॉलेजों में फर्नीचर एवं कंप्यूटर सहित आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पूरी कर दे.काम नहीं कर पा रहे है, तो इस्तीफा दे
बैठक में एक नये राजकीय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य नहीं पहुंचे थे. इसे लेकर जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी विफर पड़े. टीएमबीयू प्रशासन को अमुख प्राचार्य का वेतन रोकने सहित विभागीय कार्रवाई करने का निदेश दिया है. बैठक के क्रम में दो प्राचार्य ने अपनी तबीयत खराब रहने व उपचार चलने के बारे में जिलाधिकारी को बताया. इसे लेकर जिलाधिकारी ने उन प्राचार्यों का जमकर क्लास लगाया. जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी नौकरी में आने पर काम करना होता है. काम नहीं कर पा रहे है, तो इस्तीफा दे, लेकिन इस्तीफा मंजूर होने तक भी काम करना पड़ेगा. कहा कि एजेंडा में जो बिंदुओं पर चर्चा होना है. इससे इतर बात नहीं सुनी जायेगी. इसके बाद प्राचार्यों ने अपनी समस्या को बताने से बचते रहे.
