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Travel : Meghalaya Tourism : मानव निर्मित अद्भुत चमत्कार हैं मेघालय के ‘Living Root Bridges’, स्थानीय निवासियों के लिए हैं बेहद महत्वपूर्ण

मेघालय में यूं तो एक से बढ़कर एक देखने लायक प्राकृतिक स्थल हैं, पर Living Root Bridge अद्भुत है. मानव निर्मित यह प्राकृतिक पुल किसी चमत्कार से कम नहीं.

ऐसा लगता है जैसे मेघालय को प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया है. वैसे तो यहां देखने लायक अनेक स्थल हैं, जिनसे आपकी नजरें हटेंगी ही नहीं. पर हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे अजूबे के बारे में जो किसी चमत्कार से कम नहीं. वह अजूबा है ‘Living Root Bridge.’ ये लिविंग रूट ब्रिज मेघालय के सबसे सुंदर मूर्त विरासत स्थलों में से एक हैं. अपनी सुंदरता और अनूठेपन के लिए इन ब्रिजों को 2022 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल किया गया.

सदियों से खासी और जयंतिया समुदाय तैयार करते रहे हैं

इस ब्रिज को बनाने के लिए पेड़ों की जड़ों को इस प्रकार आपस में गूंथा जाता है कि यह एक पुल सा बन जाता है. लगता है जैसे कोई जादुई या काल्पिनक चीज है. परंतु ये ब्रिज काल्पनिक नहीं हैं. इनका निर्माण शताब्दियों से यहां के मूल निवासियों (खासी और जैन्तिया) द्वारा किया जाता रहा है. वो कहते हैं ना कि ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी है’, ये ब्रिज भी यहां के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही बनाये जाते रहे हैं. वास्तव में मानसून के दौरान जब यहां की नदियां पूरे ऊफान पर होती हैं, तब इस पार से उस पार जाना जान हथेली पर लेने के समान होता है. सो बरसात में यहां की उफनती नदियों को पार करने के लिए स्थानीय निवासी इन Bridge का उपयोग करते हैं. कह सकते हैं कि बरसात में ये पुल इनके लिए life line का काम करते हैं. ऐसा माना जाता है कि आदर्श परिस्थितियों में एक root bridge सैकड़ों वर्षों तक यथावत बना रह सकता है. ये पुल अक्सर हवा में 50 से 100 फीट ऊपर उठ जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस राज्य का सबसे लंबा लिविंग रूट ब्रिज 175 फीट लंबा है. यहां विभिन्न गांवों में लगभग 100 या उससे अधिक ज्ञात लिविंग रूट ब्रिज हैं, जिनमें से नोंग्रियाट, चेरापूंजी, नोंगबरेह और अन्य आस-पास के स्थानों में स्थित कुछ ब्रिज विशेष लोकप्रिय हैं.

एक प्रकार के Rubber Plant से तैयार किये जाते है ये ब्रिज

Living Root Bridge प्राकृतिक रूप से निर्मित पुल हैं, जो Rubber Plant के एक प्रकार, Ficus elastica से तैयार किये जाते हैं. इसके लिए नदी के दोनों किनारों पर रबर के पेड़ लगाये जाते हैं. आम तौर पर इन पेड़ों को बढ़ने और इनसे द्वितीयक हवाई जड़ें (secondary aerial roots) निकलने में लगभग एक दशक का समय लगता है. सेकेंडरी एरियल रूट्स के निकलने के बाद ही पुल बनाने वाले स्थानीय निवासी बांस का मचान बुनकर इन जड़ों को सीधा करते हैं और फिर इसके बाद ही इन जड़ों को बुनकर इनसे ब्रिज तैयार किया जाता है.

कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं ये

ये पुल क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ा महत्व रखते हैं. क्योंकि यह उन्हें अपने संबंधित बागानों, घरों या उन क्षेत्रों तक पहुंचने में सहायता करते हैं, जहां उन्हें अपने प्रोडक्ट पहुंचाने की आवश्यकता होती है.

  • यह न केवल स्थानीय वनस्पतियों का प्राकृतिक रूप से निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के अपने क्षेत्र के साथ संबंध और यहां के ज्ञान का प्रतीक होने के साथ-साथ यहां के लोगों के लिए सांस्कृतिक महत्व भी रखता है. प्रत्येक पुल के डिजाइन, प्रबंधन और रखरखाव के लिए पूरा समुदाय मिलकर काम करता है. इन पुलों के कारण इसके आसपास के एरिया के कई निवासी अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो गये हैं.
  • ये पुल जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये pollinating insects की सहायता करते हैं, Moss के ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं, और गिलहरियों के लिए आवास व पक्षियों के घोंसले के लिए स्थान प्रदान करते हैं. पेड़ों को पुलों में बदलकर, खासी लोग ऐसे कई स्थान बनाने में सफल रहे हैं जहां पशु भी सुरक्षित तरीके से नदियों को पार कर सकते हैं. Bark deer और Clouded leopard भी पुलों का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं.
  • ये पुल न केवल संबंधित क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि वहां के विकास और खुशहाली में भी सहायक होते हैं.

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