Parenting Tips: बच्चों को मना करने के बाद भी वे वही काम क्यों करते हैं? जानें हैरान कर देने वाला जवाब

Parenting Tips: अक्सर हम अपने बच्चों से जिस काम को करने के लिए मना करते हैं वे उसी काम को करने लग जाते हैं. लेकिन, इसके पीछे कारण क्या है और आपको ऐसे हालात में क्या करना चाहिए इसके बारे में आपने कभी सोचा है? अगर नहीं तो यह आर्टिकल आपके काफी काम की होने वाली है.

Parenting Tips: हर माता-पिता अक्सर इस समस्या का सामना करते हैं कि बच्चे वही काम करने लगते हैं जिसे करने से उन्हें मना किया जाता है. अगर आप बच्चे से कहते हैं कि मोबाइल मत छुओ, तो उनका ध्यान तुरंत उसी पर चला जाता है. अगर कहते हैं कि बाहर मत जाओ, तो वे ज्यादा बाहर जाने की जिद करने लग जाते हैं. यह स्थिति पेरेंट्स के लिए काफी परेशान करने वाला और थकाने वाला हो सकता है. लेकिन असल में ऐसा होना बच्चों की फितरत और उनके दिमाग के काम करने के तरीके से जुड़ा है. जब हम बच्चों को रोकते हैं, तो उनके मन में उस काम के प्रति क्यूरियोसिटी और अट्रैक्शन और बढ़ जाता है. चलिए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह और पेरेंट्स इस हालात में क्या कर सकते हैं.

मना करने से बढ़ती है क्यूरियोसिटी

जब हम बच्चों को किसी चीज से रोकते हैं, तो उनके मन में तुरंत क्यूरियोसिटी पैदा हो जाती है. उन्हें लगता है कि अगर मना किया जा रहा है तो जरूर उसमें कुछ खास या मजेदार है. यही सोच उन्हें उस काम को करने की ओर और ज्यादा खींचती है.

यह भी पढ़ें: Parenting Tips: बच्चे को बनना चाहते हैं एक बेहतर लीडर और सफल इंसान? ये कारगर टिप्स आएंगे आपके काम

यह भी पढ़ें: Parenting Tips: सफल ही नहीं बेहतर इंसान भी बनेगा बच्चा, लाइफ की असली वैल्यू सिखाने के लिए पैरेंट्स अपनाएं ये 5 कारगर टिप्स

पेरेंट्स की चुप्पी और सख्ती

अक्सर पेरेंट्स बच्चों को केवल ‘नहीं करना’ कहकर रोक देते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि क्यों नहीं करना चाहिए. बच्चे जब कारण नहीं समझते तो वे मना किये जाने को चैलेंज समझ लेते हैं. कई बार सख्ती बच्चों को और ज्यादा रिएक्टिव बना देती है और वे जानबूझकर वही करने लगते हैं.

रिवर्स साइकोलॉजी का असर

साइकोलॉजी के अनुसार, जब बच्चों को किसी चीज से रोका जाता है, तो उनका दिमाग इसे आजादी छीनना समझता है. उन्हें लगता है कि उनकी आजादी छीनी जा रही है. ऐसे में वे बैरियर्स को तोड़ने की कोशिश करते हैं ताकि खुद को आजाद साबित कर सकें.

यह भी पढ़ें: Parenting Tips: होमवर्क से लेकर क्लास टॉपर तक बनने तक, बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए अपनाएं ये 6 अमेजिंग ट्रिक्स

ध्यान खींचने की कोशिश

कई बार बच्चे केवल अपने पेरेंट्स का ध्यान खींचने के लिए भी वही काम करते हैं जिसे करने से मना किया जाता है. अगर बच्चा देखता है कि मना की गई चीज करने पर उसे इंस्टैंट रिएक्शन मिलता है, तो वह बार-बार वही दोहराता है.

पेरेंट्स क्या करें?

अगर आपके घर पर छोटे बच्चे हैं तो उसे सिर्फ “मत करो” कहने के बजाय बच्चों को आसान भाषा में ऐसा न करने के पीछे का कारण भी बताएं. इसके अलावा अगर किसी चीज से रोक रहे हैं तो उसके दूसरे ऑप्शंस भी सुझाएं. उदहारण के लिए मोबाइल मत चलाओ, चलो कोई गेम खेलते हैं. एक पैरेंट होने के नाते आपका यह फर्ज बनता है कि हर चीज पर रोक लगाने के बजाय बच्चों को कुछ हद तक खुद सीखने दें. अगर आप नहीं जानते हैं तो बता दें गुस्से या सख्ती से बच्चों का व्यवहार और जिद्दी हो सकता है. बच्चों को शांत रहकर समझाना ज्यादा असरदार होता है.

यह भी पढ़ें: Parenting Tips: पैरेंट्स की असफलता बच्चों के लिए कैसे बनती है सक्सेस का लेसन? जानें सबसे बड़ी पैरेंटिंग हैक

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Saurabh poddar

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >