Hanuman Ansh: फिल्मों की बॉक्स ऑफिस जर्नी हमेशा बड़ी स्क्रीन और बड़े स्टार्स के दम पर नहीं चलती. कई बार छोटी शुरुआत वाली फिल्म भी अपने कंटेंट और दर्शकों के भरोसे थिएटर में टिक जाती है. कुछ ऐसा ही ‘हनुमान अंश’ के साथ हुआ. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने लिमिटेड स्क्रीन्स के साथ सिनेमाघरों में दस्तक दी. इसको यश की टॉक्सिक से जबरदस्त टक्कर मिली. कन्नड़ एक्टर की मूवी की वजह से भक्ति ड्रामा के स्क्रीन्स तेजी से कम हुए.
350 थिएटर्स से सीधे 25-30 स्क्रीन्स पर पहुंच गई थी हनुमान अंश
रागिनी सोना ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया, ''हनुमान अंश का पहला हफ्ता टीम की उम्मीदों के मुताबिक रहा. फिल्म ने करीब 350 थिएटर्स से शुरुआत की, लेकिन दूसरे हफ्ते में आवारापन 2 और टॉक्सिक जैसी बड़ी फिल्मों की एंट्री हुई और इसका स्क्रीन काउंट बुरी तरह प्रभावित हुआ. यह महज 25-30 थिएटर्स तक सिमट गई. यहां कहानी खत्म होती नजर आ रही थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस बिजनेस टीम के लिए उम्मीद की बड़ी किरण बनी.
उन्होंने आगे कहा, हम डरे नहीं, अगले हफ्ते दोबारा फिल्म ज्यादा थिएटर्स में चलाने का फैसला किया गया और इसके लिए थोड़ा खर्च भी किया गया. टीम ने हिसाब लगाया कि अगर फिल्म एक हफ्ता और चलती है, तो ये बजट निकल सकता है. आखिरकार फिल्म एक और हफ्ते तक सिनेमाघरों में चलती रही और उसके बाद जो हुआ, वह टीम के लिए एक यादगार सफर बन गया.
टॉक्सिक से क्लैश पर टीम को था डर
यश की टॉक्सिक के सिनेमाघरों में आने के बाद ‘हनुमान अंश’ के लिए चुनौती और बढ़ गई थी. दोनों फिल्मों को लेकर बॉक्स ऑफिस पर तुलना भी शुरू हो गई. हालांकि रागिनी ने बताया कि उनकी टीम ने कभी टॉक्सिक को ऐसी फिल्म नहीं माना, जिसे उन्हें हराना है. उन्होंने माना कि इस पूरे दौर में टीम के मन में डर जरूर था. जब भी दबाव बढ़ता, वे एक-दूसरे को फिल्म का ही डायलॉग याद दिलाते थे, “हनुमान चालीसा पढ़ते हो, फिर भी डरते हो?” इसके बाद टीम बाकी चीजें बाबा की आस्था पर छोड़ देती थी.
टॉक्सिक को हराना नहीं, दोनों फिल्मों की सफलता की थी उम्मीद
रागिनी ने साफ किया कि उनकी टीम की सोच कभी भी ‘टॉक्सिक’ के खिलाफ जाने की नहीं थी. वे चाहती थीं कि सभी फिल्मों को थिएटर्स में अच्छा रिस्पॉन्स मिले. अगर यश अच्छा परफॉर्म करती है तो इसका फायदा सिर्फ उस फिल्म को नहीं, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को मिलेगा.
