RIP गोपालदास नीरज : ''शोखियों में फूलों का शबाब'' घोलनेवाले गीतकार का जाना

कई पीढ़ी के लोगों के पसंदीदा कवि और गीतकार रहे गोपालदास नीरज अब हमारे बीच नहीं रहे. उनकी ख्याति रुमानियत और शृंगार रस के कवि के तौर पर रही,लेकिन उन्होंने अपनी कविताओं में जीवन दर्शन को भी काफी गहराई से पिरोया. दशकों तक कवि सम्मेलनों का जाना-पहचाना नाम रहे गोपालदास सक्सेना, जिन्हें गोपालदास नीरज के […]

कई पीढ़ी के लोगों के पसंदीदा कवि और गीतकार रहे गोपालदास नीरज अब हमारे बीच नहीं रहे. उनकी ख्याति रुमानियत और शृंगार रस के कवि के तौर पर रही,लेकिन उन्होंने अपनी कविताओं में जीवन दर्शन को भी काफी गहराई से पिरोया.

दशकों तक कवि सम्मेलनों का जाना-पहचाना नाम रहे गोपालदास सक्सेना, जिन्हें गोपालदास नीरज के रूप में ज्यादा जाना गया, को हिंदी फिल्मजगत ने भी उतने ही सम्मान से अपनाया.

उन्होंने हिंदी फिल्मों के गीतों में भाषायीस्तर पर बेहतरीन प्रयोग किये और ऐसे कई गीत रचे,जिन्होंनेपीढ़ी दर पीढ़ी श्रोताओं को खुद से जोड़े रखा.

गोपालदास नीरज ने एक साक्षात्कार में कहा था- ‘दुनिया से विदा लेते समय अगर आपके गीत और कविताएं लोगों की जुबां और दिल में हों, तो यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी.’

बिलकुल ऐसा हो भी रहा है. अबजब नीरज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक नीरज के गीत छाये और बजाये जा रहे हैं. उन्हें उनकी रचनाओं से याद किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें : पद्मभूषण कवि गोपाल दास नीरज नहीं रहे, एम्स में ली अंतिम सांस

कालजयी नगमें

हिंदी फिल्म जगत को नीरज के दिये नगमें कालजयी रहे हैं. दरअसल, नीरज को मुंबई के फिल्म जगत से गीतकार के रूप में फिल्म ‘नई उमर की नई फसल’ के गीत लिखने का न्योता मिला.

इस फिल्म के लिए उनके लिखे दो गीत – ‘कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे…’ और ‘देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जाएगा…’ बड़े लोकप्रिय हुए.

इसके बाद तो उनके सामने फिल्मों के लिए गीत लिखने के प्रस्तावों की छड़ियां लग गयीं. फिर क्या था? वे मुंबई में रहकर फिल्मों के लिए गीत लिखने लगे. उन्होंने ‘मेरा नाम जोकर’, ‘शर्मीली’, ‘प्रेम पुजारी’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में कई गीत लिखे, जिनका जादू दशकों बाद आज भी बरकरार है.

आइए नजर डालें महाकवि नीरज की उन रचनाओं की, जिन्होंने हिंदी फिल्म जगत में लोकप्रियता के कीर्तिमान गढ़े-

जिन गीतों के लिए मिले तीन फिल्म फेयर पुरस्कार :

  • काल का पहिया घूमे रे भइया (फिल्म : चंदा और बिजली, 1970)
  • बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं (फिल्म : पहचान, 1971)
  • ए भाई! जरा देख के चलो (फिल्म : मेरा नाम जोकर, 1972)

ये गीत अाज भी हैं जुबां पर :

  • कहता है जोकर सारा जमाना, आधी हकीकत आधा फसाना…
  • रंगीला रे, तेरे रंग में क्यूं रंगा है मेरा मन…
  • शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब…
  • दिल आज शायर है, गम आज नगमा है, शब ये गजल है सनम…
  • आज मदहोश हुआ जाये रे, मेरा मन, मेरा मन…
  • लिखे जो खत तुझे, हजारों रंग के नजारे बन गये…
  • फूलों के रंग से, दिल की कलम से, तुझको लिखी रोज पाती…
  • मैंने कसम ली, हां मैंने कसम ली…
  • मेघा छाये आधी रात…
  • बैरन बन गयी निंदिया…
  • फूलों की बगिया महकेगी…

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >