UPSC Topper Suyash Dwivedi: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में बाराबंकी के लखपेड़ाबाग के रहने वाले सुयश द्विवेदी ने ऑल इंडिया 94वीं रैंक (AIR 94) हासिल किया है. सुयश की यह सफलता इसलिए बेहद खास है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम देश की सेवा में तैनात रहते हुए अपने 5वें प्रयास में हासिल किया है. आइए जानते हैं सुयश द्विवेदी (UPSC Topper Suyash Dwivedi) के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.
UPSC Topper Suyash Dwivedi: कौन हैं यूपीएससी टॉपर सुयश द्विवेदी?
सुयश द्विवेदी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी शहर के लखपेड़ाबाग इलाके के रहने वाले हैं. वह बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होनहार रहे हैं. सुयश के पिता कौशलेंद्र नाथ द्विवेदी पेशे से एक शिक्षक हैं और लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. एक शिक्षक के बेटे के रूप में सुयश को घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल मिला. उनके पिता ने हमेशा शिक्षा की ताकत को समझा और बच्चों को कड़े परिश्रम के लिए प्रेरित किया.
CISF में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर रहते हुए की पढ़ाई
सुयश द्विवेदी की यह कामयाबी उन युवाओं के लिए बहुत बड़ी मिसाल है जो समय की कमी का बहाना बनाते हैं. सुयश वर्तमान में असम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात हैं. एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के रूप में देश की सुरक्षा की ड्यूटी निभाने के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी जारी रखी. नौकरी के कड़े अनुशासन, ड्यूटी के व्यस्त शेड्यूल और थकावट के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुयश के मजबूत इरादों ने हर मुश्किल को आसान बना दिया.
लगातार 4 बार मिली असफलता
सुयश (UPSC Topper Suyash Dwivedi) को यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. उन्हें शुरुआती चार प्रयासों में मनमुताबिक सफलता नहीं मिल सकी थी. लगातार चार बार रिजेक्शन मिलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने धैर्य को बनाए रखा. सुयश ने हर असफलता से अपनी कमियों को पहचाना, स्ट्रेटेजी बदली और दोगुनी मेहनत के साथ 5वें प्रयास में परीक्षा दी, जिसके परिणाम स्वरूप आज वह टॉप 100 की लिस्ट में शामिल हैं.
मध्यमवर्गीय परिवार से नाता
सुयश द्विवेदी एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनकी इस शानदार अचीवमेंट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यूपीएससी (UPSC Exam) जैसी परीक्षा को पास करने के लिए किसी बड़े बैकग्राउंड, बड़े शहरों की महंगी कोचिंग या बहुत ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं होती. अगर किसी छात्र के पास सही मार्गदर्शन और कड़ी लगन हो, तो वह सीमित संसाधनों के बीच भी ऊंचे पदों तक जाने का सफर तय कर सकता है.
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