IAS Divya Tanwar Career Journey: यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है और इस परीक्षा को पास करके आईएएस या आईपीएस बनने का कई छात्रों का सपना होता है. इस परीक्षा को लगातार दो बार क्रैक करने वाली यंगेस्ट IAS दिव्या तंवर की कहानी काफी प्रेरणादायक है.
देश की बेटियां हर क्षेत्र मे आगे हैं, यह महज एक कहावत ही नहीं है. ठीक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है आईएएस दिव्या तंवर की, जिन्होंने कम उम्र और सीमित संसाधनों के बावजूद असंभव को संभव कर दिखाया है. उन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार यूपीएससी परीक्षा को क्रैक किया है. 2021 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने 438वीं रैंक हासिल की और मात्र 21 साल की उम्र में सबसे कम उम्र की आईपीएस अधिकारियों में शामिल हुईं. इसके बाद यूपीएससी 2022 में 105वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर आईपीएस से आईएएस (IAS) अधिकारी बन गईं.
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Self Study Goal and Routine : सेलफ स्टडी कर पाई सफलता
दिव्या तंवर ने अपनी लगातार मेहनत और लगन से सफलता पाई है. उन्होंने एक इंटरव्यू मे बताया की वह पढ़ाई के Iलिए किसी कोचिंग पर निर्भर नहीं थीं, बल्कि वह सेल्फ स्टडी करती थीं. शुरूआत में वह कुछ घंटे ही पढ़ती थीं धीरे धीरे उन्होंने अपनी पढ़ाई के समय को बढ़ाया और लगभग 8 से 9 घंटे पढ़ाई करने लगीं.
दिव्या तंवर ने बताया की करंट अफेयर्स पर फोकस और पढ़ाई पर अच्छा ध्यान दिया जाए तो प्रीलिम्स निकालने में मदद मिलती है. स्कूल में पढ़ाकर और पैसे कमा कर अपनी पढ़ाई करती थीं. YouTube और NCERT से वह पढ़ाई में मदद लेती थीं. इसके अलावा टेस्ट सीरीज देती थीं. UPSC प्रीलिम्स परीक्षा निकालने के बाद Mains परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ महीनों के लिए दिल्ली गई थीं.
Divya Tanwar Journey: ऐसी रही दिव्या तंवर की जर्नी
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने नवोदय विद्यालय से की है. इसके बाद ग्रेजुएशन हरियाणा स्थित महेंद्रगढ़ के गवर्नमेंट पीजी कॉलेज से की है. इसके बाद ही उन्होंने UPSC के लिए तैयारी शुरू कर दी थी और 2021 में पहला अटेम्प्ट दिया.
Study Motivation: मोटिवेशन के लिए गोल बनाना जरूरी
दिव्या तंवर ने कहा की पढ़ाई के लिए मोटिवेशन तब आती है जब लाइफ में आपका कोई गोल हो. इसके अलावा पेरेंट्स को प्राउड फील करवाना है. इस मोटिवेशन के साथ पूरी मेहनत से पढ़ाई करती थीं.
FINANCIAL STRUGGLE : आर्थिक संघर्ष के बावजूद सफलता
दिव्या का बचपन संघर्षों से भरा रहा. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन उनकी मां ने कभी हार नहीं मानी. मां ने अकेले ही मेहनत मजदूरी करके बच्चों की परवरिश की और दिव्या की पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया. दिव्या अक्सर अपनी मां को अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय देती हैं.
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