JEE Advanced 2026: IIT रुड़की ने जेईई एडवांस्ड 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल की परीक्षा में जहां लड़कों में बिहार के शुभम कुमार ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है, वहीं लड़कियों की कैटेगरी में आरोही देशपांडे ने बाजी मारी है. आरोही ने पूरे देश में महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल कर अपने परिवार और राज्य का नाम रोशन किया है. आइए जानते हैं कि आरोही की सफलता की कहानी क्या है.
कौन हैं जेईई एडवांस्ड की महिला टॉपर आरोही?
जेईई एडवांस्ड 2026 में देश भर की छात्राओं में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली आरोही देशपांडे मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली हैं. वह पढ़ाई में शुरू से ही बहुत सिरियस और होनहार रही हैं. इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली आरोही ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा में अपनी कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है.
JEE Advanced 2026 परीक्षा में कैसा रहा आरोही का प्रदर्शन?
आईआईटी दिल्ली जोन से परीक्षा देने वाली आरोही देशपांडे ने JEE Advanced 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने परीक्षा में 360 में से कुल 280 मार्क्स हासिल किए हैं. उनकी ऑल इंडिया कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) 77वीं रही है, जिसके साथ ही वह इस साल की नेशनल फीमेल टॉपर बन गई हैं. इससे पहले हुई जेईई मेन परीक्षा में भी वह देश के टॉप रैंकर्स की लिस्ट में शामिल थीं और उन्होंने ऑल इंडिया 99वीं रैंक हासिल की थी.
कोटा में रहकर 4 साल तक की तैयारी
पुणे की रहने वाली आरोही ने अपनी इस सफलता की नींव राजस्थान के कोटा शहर में रखी. वह पिछले 4 सालों से कोटा में रहकर जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने यहां प्राइवेट कोचिंग से तैयारी की थी. घर से दूर रहकर, त्योहारों और छुट्टियों की परवाह किए बिना उन्होंने पूरा ध्यान सिर्फ अपनी पढ़ाई पर केंद्रित रखा.
क्या था आरोही का स्टडी प्लान?
आरोही अपनी पढ़ाई को लेकर काफी अनुशासित रहती थीं. छुट्टियों और रविवार के दिनों का वह पूरा उपयोग करती थीं. अगर किसी वजह से कोई टॉपिक छूट जाता था, तो वह संडे के दिन एक्स्ट्रा टाइम निकालकर अपना बैकलॉग और सिलेबस पूरा करती थीं. पढ़ाई के दौरान नियमित रूप से रिवीजन करना और खुद के नोट्स बनाना उनकी आदत में शामिल था.
‘कलर कोडिंग’ टेक्नीक से की पढ़ाई
अपनी पढ़ाई को स्मार्ट और आसान बनाने के लिए आरोही एक खास टेक्नीक का यूज करती थीं. वह केमिस्ट्री और बाकी विषयों के नोट्स बनाते समय ‘कलर कोडिंग’ (अलग-अलग रंगों के पेन और हाइलाइटर्स) का इस्तेमाल करती थीं. इससे किताबों और कॉपियों में लिखे महत्वपूर्ण पॉइंट्स और फॉर्मूले तुरंत नजर में आ जाते थे, जिससे परीक्षा के आखिरी दिनों में रिवीजन करना बहुत आसान हो गया.
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