UPSC Cadre Allocation: सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले IAS, IPS और IFS अधिकारियों की कैडर अलॉटमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. इसे UPSC Cadre Allocation Policy 2026 नाम दिया गया है. नई पॉलिसी का मकसद कैडर अलॉटमेंट को बैलेंस्ड और ट्रांसपैरेंट करना है. इसमें मेरिट के बेसिस पर ही कैडर का अलॉटमेंट हो सकेगा.
नई नीति (UPSC Cadre Allocation) के मुताबिक इस बार इंसाइडर और आउटसाइडर सिस्टम को लेकर नियम और ज्यादा सख्त और साफ कर दिए गए हैं. आइए इसे 10 पॉइंट में आसान भाषा में समझते हैं.
UPSC Cadre Allocation Policy में क्या होगा?
- सरकार ने IAS, IPS और IFoS अफसरों की पोस्टिंग के नियम बदल दिए हैं, जो अब CSE 2026 से लागू होंगे.
- अब होम स्टेट पोस्टिंग तभी मिलेगी जब राज्य में इंसाइडर वैकेंसी होगी और कैंडिडेट ने इसके लिए पहले से सहमति दी होगी.
- सभी राज्यों की वैकेंसी 1 जनवरी को मौजूद कैडर गैप के हिसाब से तय की जाएगी, देर से भेजी गई डिमांड नहीं मानी जाएगी.
- EWS की सीट को अलग नहीं माना जाएगा, बल्कि उसे जनरल कैटेगरी में ही जोड़ा जाएगा.
- पूरे देश के कैडर को चार ग्रुप में बाँटा गया है, और आउटसाइडर पोस्टिंग इन्हीं ग्रुप के चक्कर में दी जाएगी.
- होम पोस्टिंग के लिए Cycle सिस्टम लागू किया गया है, यानी हर 25 रैंक को एक साइकल माना जाएगा.
- अगर किसी राज्य में किसी कैटेगरी का इंसाइडर कैंडिडेट नहीं मिलता, तो सीट एक्सचेंज सिस्टम से दूसरी कैटेगरी से भरी जाएगी.
- दिव्यांग यानी PwBD कैंडिडेट्स को पोस्टिंग में पहली प्राथमिकता दी जाएगी, जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त सीट भी बनाई जा सकती है.
- अगर किसी को आउटसाइडर पोस्टिंग में गलती से अपना ही राज्य मिल जाता है, तो उसे तुरंत बदल दिया जाएगा.
- पुराने कैडर अलॉटमेंट नियम अब खत्म कर दिए गए हैं और नया सिस्टम पहले से ज्यादा सख्त और पारदर्शी माना जा रहा है.
UPSC Cadre Allocation Policy PDF
राज्यों को 4 ग्रुप में बांटा गया
| ग्रुप | शामिल राज्य / कैडर |
|---|---|
| ग्रुप 1 | एजीएमयूटी (AGMUT), आंध्र प्रदेश, असम–मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़ |
| ग्रुप 2 | गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश |
| ग्रुप 3 | महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु |
| ग्रुप 4 | तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल |
UPSC में 2017 से लेकर अब तक जो कैडर अलॉटमेंट सिस्टम लागू था, उसका आधार जियोग्राफिकल जोन और इंसाइडर–आउटसाइडर बैलेंस था. इसका मकसद यह था कि कोई भी अफसर पूरे करियर में सिर्फ अपने ही इलाके तक सीमित न रहे.
नई नीति में यह भी साफ कर दिया गया है कि EWS सीटें Unreserved कैटेगरी में ही गिनी जाएंगी. कैडर रोस्टर में इन्हें अलग से ट्रीट नहीं किया जाएगा. इससे लंबे समय से चला आ रहा कन्फ्यूजन खत्म हो गया है. नई नीति सिविल सेवाओं में फेयरनेस और ट्रांसपेरेंसी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है.
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