Delhi Private University Bill: दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना से लेकर संचालन तक अब सरकार की नजर होगी. दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत अब दिल्ली के सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को हर कोर्स में दिल्ली के छात्रों के लिए 25 सीटें रिजर्व रखनी होंगी. हालांकि, अभी इस बिल को कानून का रूप नहीं दिया गया है. इसके लिए बिल को विधानसभा की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा.
1.दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें रिजर्व
अगर ये बिल पास हो जाता है और कानून का रूप लेता है तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी के हर कोर्स की 25 फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए रिजर्व रहेंगी. इन सीटों पर एडमिशन दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार किया जाएगा. इसका उद्देश्य दिल्ली के लोकल स्टूडेंट्स को राजधानी में उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है.
2.यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की शर्त
प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने वाली संस्था के पास जरूरी जमीन का कम से कम 30 साल का स्वामित्व या लीज अधिकार होना चाहिए. इसके अलावा यूनिवर्सिटी को क्लासरूम, लैबोरेटरी, लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और छात्रों के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी.
3.UGC और नियामक संस्थाओं के नियम मानने होंगे
प्राइवेट यूनिवर्सिटी को UGC और NEP के नियमों का पालन करना होगा. यूनिवर्सिटी के फैकल्टी और एकेडमिक स्टाफ की नियुक्ति भी UGC के निर्धारित मानकों के अनुसार करनी होगी. प्रस्तावित व्यवस्था में यूनिवर्सिटी के लिए यूनिटरी मॉडल रखा गया है, यानी उसे अपने कैंपस के जरिए संचालित किया जाएगा और संबद्ध कॉलेज चलाने की अनुमति नहीं होगी.
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4.फीस पर सरकार की निगरानी
बिल में दिल्ली के छात्रों के लिए मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप का भी प्रस्ताव है. इसके तहत 5 फीसदी दिल्ली के छात्रों को पूरी फीस माफी, 10 फीसदी को 50 फीसदी फीस में छूट और 10 फीसदी छात्रों को 25 फीसदी फीस में छूट देने का प्रावधान प्रस्तावित है.
5.रेगुलेटरी व्यवस्था और सरकार की निगरानी
प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री को प्रत्येक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का विजिटर बनाए जाने का प्रावधान है. विजिटर को यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगने, निरीक्षण करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्देश जारी करने का अधिकार होगा. जरूरत पड़ने पर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक, अकादमिक और वित्तीय मामलों की जांच भी कराई जा सकेगी.
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
इस प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के इच्छुक स्थानीय छात्रों के लिए सीटों और फीस दोनों के स्तर पर राहत का प्रावधान होगा. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य दिल्ली में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना और छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम करना है.
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