NSE Report: भारतीय शेयर बाजार में इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (आम निवेशक) का तरीका अब बदल रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में रिकॉर्ड निवेश के बाद अब लोग डायरेक्ट शेयर खरीदने के बजाय म्यूचुअल फंड्स के रास्ते को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में जहां निवेशकों ने 1.7 लाख करोड़ रुपये (19.8 बिलियन डॉलर) का भारी निवेश किया था, वहीं 2025 में करीब 5,717 करोड़ रुपये की मामूली बिकवाली देखने को मिली. हालांकि, यह गिरावट चिंता की बात नहीं है, बल्कि निवेशकों की बढ़ती मैच्योरिटी को दर्शाती है.
क्या बाजार से दूरी बना रहे हैं भारतीय निवेशक?
असल में भारतीय घरों की बचत अब पारंपरिक तरीकों से निकलकर शेयर बाजार का हिस्सा बन रही है. पिछले 6 वर्षों में आम लोगों ने सेकेंडरी मार्केट में कुल 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. NSE के मुताबिक, लोग अब सीधे दांव लगाने के बजाय प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स (म्यूचुअल फंड्स) के जरिए पैसा लगाना सुरक्षित समझ रहे हैं. आज की स्थिति यह है कि लिस्टेड कंपनियों में आम लोगों की हिस्सेदारी 18.75% तक पहुंच गई है, जो पिछले दो दशकों में सबसे ऊंचा स्तर है.
वेल्थ क्रिएशन: 5 साल में 5 गुना बढ़ा पैसा
आंकड़े गवाह हैं कि इक्विटी ने वेल्थ क्रिएशन में कमाल किया है. मार्च 2020 के मुकाबले आज निवेशकों की कुल होल्डिंग की वैल्यू 84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो 5 साल पहले के मुकाबले 5 गुना ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि म्यूचुअल फंड्स में कुल जमा पैसे (AUM) का 84% हिस्सा आम जनता का ही है. अप्रैल 2020 से अब तक, उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय परिवारों ने करीब 53 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है.
उतार-चढ़ाव के बीच क्या है भविष्य का संकेत?
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बाजार में थोड़ी हलचल और गिरावट जरूर दिखी, लेकिन लॉन्ग-टर्म में निवेशकों का भरोसा कायम है. यह बढ़ती संपत्ति न केवल लोगों के बैंक बैलेंस को मजबूत कर रही है, बल्कि उनकी खर्च करने की क्षमता (Consumption) और आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है. स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी अब समझ चुकी है कि अमीर बनने के लिए सिर्फ कमाना काफी नहीं, बल्कि सही जगह निवेश करना भी जरूरी है.
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