Coronavirus Impact: 21 दिनों के Lockdown के बदले मोदी सरकार ने दिया सिलेंडर, खाना, पीएफ Free, पढ़िये क्या-क्या है छूट

देश में कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से बीते 25 मार्च से संपूर्ण लॉकडाउन है.

देश में कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से बीते 25 मार्च से संपूर्ण लॉकडाउन है. इस लॉकडाउन के दौरान आम अवाम को किसी तरह की आर्थिक परेशानी से उबारने के लिए गुरुवार को केंद्र सरकार ने राहत पैकेज का ऐलान किया, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी तिजोरी के ताले खोल दिए. कुल मिलाकर यह कि देश के लोगों को हर चीज फ्री में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि लोग-बाग घर में ठहरे रहने के दौरान भूखे न रह सकें. आइए जानते हैं कि सरकार ने आगामी तीन महीनों के लिए क्या-क्या फ्री दिया है और किस-किस में मोहलत मिली है…?

तीन महीने तक ईएमआई से छूट

क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने वालों को राहत

उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर फ्री

कोरोना कमांडोज को 15 लाख का लाइफ इंश्योरेंस

पांच किलो गेहूं या चावल फ्री

देश के 8.65 किसानों को 2,000 रुपये का मासिक किस्त

मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में बढ़ोतरी

बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं को एक-एक हजार अतिरिक्त

महिला जनधन खातों में हर महीने 500 रुपये होंगे क्रेडिट

स्वयं सहायता समूह को 20 लाख रुपये तक का लोन

ईपीएफ खातों में अंशदान

ईपीएफ खातों से 75 फीसदी निकासी

3.5 लाख निर्माण मजदूरों को आर्थिक लाभ

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लेखक के बारे में

Author: KumarVishwat Sen

Published by: Prabhat Khabar

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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