बिहार-झारखंड और बंगाल के इन बाजारों में मिलते हैं सबसे सस्ते ऊनी कपड़े, दाम देखते भाग जाएगा जाड़ा

Cheapest Woolen Markets: बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सबसे सस्ते ऊनी बाजारों में इस जाड़े की पूरी खरीदारी आसानी से की जा सकती है. पटना के गांधी मैदान एक्सपो, रांची के अपर बाजार और कोलकाता के गरियाहाट मार्केट में मोंटे कार्लो, लक्स इनफर्नो, डॉलर अल्ट्रा, जॉकी थर्मल्स जैसे ब्रांड कम कीमत पर मिलते हैं. यहां स्वेटर, शॉल, जैकेट और थर्मल 150 रुपये से शुरू हो जाते हैं. कम बजट में अच्छी क्वालिटी के ऊनी कपड़े चाहने वालों के लिए ये बाजार बेहतरीन विकल्प हैं.

Cheapest Woolen Markets: जाड़े का मौमस शुरू होते ही लोग गर्म कपड़ों की खरीदारी के लिए किफायती बाजार खोजने लगते हैं. खासकर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में ऐसे कई मार्केट हैं, जहां ऊनी कपड़े बेहद सस्ते दामों पर मिल जाते हैं और उनकी क्वालिटी भी ठीक-ठाक रहती है. इन बाजारों में कई प्रमुख ब्रांड कम कीमत पर मिल जाते हैं और ग्राहकों की पसंद के अनुसार वेराइटी भी काफी मिलती है. आइए, जानते हैं कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के किन-किन बाजारों में सबसे सस्ते ऊनी कपड़े मिलते हैं.

पटना में गांधी मैदान का एक्जिबिशन और मारुफगंज

बिहार की राजधानी पटना में हर साल गांधी मैदान का विंटर एक्सपो सबसे चर्चित रहता है. यहां मोंटे कार्लो, डॉलर अल्ट्रा, रूपा थर्मोकोट, लक्स इनफर्नो, जॉकी थर्मल्स जैसे ब्रांड्स थर्मल वियर 250 रुपये से 550 रुपये तक में मिल जाते हैं. मारुफगंज और मौर्यालोक कॉम्प्लेक्स में शॉल और स्वेटर 150 रुपये से 400 रुपये तक में मिल जाते हैं. अलावा, पटना और सहरसा में विशाल मेगा मार्ट में भी ऊनी कपड़े मिल जाते हैं. यहां पर ऊनी स्वेटर, शॉल और कार्डिगन 500 से 3500 रुपये के बीच में मिल जाते हैं. पटना का ट्रेंड्स स्टोर भी जाड़ा के कपड़ों के लिए अधिक प्रसिद्ध है.

रांची का अपर बाजार बड़ा तालाब और पोताला मार्केट

झारखंड की राजधानी रांची का अपर बाजार सबसे सस्ता विंटर मार्केट माना जाता है. यहां पर लक्स कोजी थर्मल्स डॉलर अल्ट्रा, रूपा फ्रंटलाइन थर्मल्स और मोंटे कार्लो लाइट जैसे ब्रांड थर्मल 300 रुपये से 500 रुपये में आसानी से मिल जाते हैं. बड़ा तालाब मार्केट में शिव नरेश, माचो थर्मल्स, कैंटाबिल स्वेटर्स का भारी स्टॉक रहता है, जहां ऊनी स्वेटर 200 रुपये से 450 रुपये और बच्चों के स्वेटर 120 रुपये से 250 रुपये तक मिल जाते हैं. इसके अलावा, रांची का पोताला मार्केट भी काफी पॉपुलर है. यह एक सीजनल मार्केट है, जहां हर सर्दी के शुरू होते ही ऊनी स्वेटर, जैकेट, शॉल, मफलर, टोपी, मोजे आदि बड़े दामों से कम दर पर मिलते हैं. स्वेटर की कीमतें अक्सर लगभग 300 रुपये से शुरू होती हैं.

कोलकाता का गरियाहाट और न्यू मार्केट

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गरियाहाट मार्केट और न्यू मार्केट विंटर वियर की खरीदारी के सबसे सस्ते ठिकाने हैं. यहां ओसवाल वुलेन्स, मोंटे कार्लो, लक्स इनफर्नो, डॉलर अल्ट्रा, ओक्टेव और जॉकी थर्मल्स सस्ते रेंज में खरीदे जा सकते हैं. इसके अलावा, कोलकाता के न्यू मार्केट में ड्यूक, कैंटाबिल, विंटरवीयर प्रो और रूपा थर्मोकोट जैसी कंपनियों के जैकेट सस्ती दरों पर मिल जाते हैं. इस मार्केट में हाथ से बुने स्वेटर भी कम कीमत पर उपलब्ध रहते हैं. पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में विशाल मेगामार्ट में जाड़े के कपड़े आसानी से मिल जाते हैं.

पूर्वी भारत के टॉप के 10 सस्ते ब्रांड

  • मोंटे कार्लो लाइट
  • डॉलर अल्ट्रा
  • लक्स इनफर्नो
  • रूपा थर्मोकोट
  • जॉकी थर्मल्स
  • शिव नरेश
  • ओक्टेव
  • कैंटाबिल
  • ओसवाल वुलेन
  • ड्यूक

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लोकल मार्केट में सस्ते और अच्छे ऊनी कपड़े

इन ब्रांड्स के थर्मल और स्वेटर ईस्ट इंडिया के लोकल मार्केट में सस्ती कीमत पर मिल जाते हैं, जबकि ऑनलाइन इनकी कीमत इससे कुछ अधिक होती है. अगर आप इस सर्दी में कम बजट में अच्छे ऊनी कपड़े खरीदना चाहते हैं, तो पटना का गांधी मैदान एक्सपो, रांची का अपर बाजार, पोताला मार्केट और कोलकाता का गरियाहाट मार्केट बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं. यहां ब्रांडेड ऊनी कपड़े बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं और वेरायटी भी भरपूर मिलती है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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