Red Sea में तेल टैंकरों पर हमले के बाद उछले कच्चे तेल के दाम, ब्रेंट 95 डॉलर के पार, बढ़ी सप्लाई की चिंता

सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले के बाद तेल बाजार में उछाल आया. जानिए ब्रेंट क्रूड, WTI क्रूड और मिडिल ईस्ट तनाव का ग्लोबल मार्केट पर क्या असर पड़ा.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर भी साफ दिखने लगा है. बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. इस खबर के बाद ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई और ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया.

आखिर हुआ क्या है?

हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने Encelia और Layla नाम के दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया. उनका आरोप है कि इन जहाजों ने उनके लगाए गए ब्लॉकेड का उल्लंघन किया था. हमले से पहले UK Maritime Trade Operations (UKMTO) ने भी जानकारी दी थी कि सऊदी अरब के अल शुकैक (Al Shuqaiq) के पास लाल सागर में एक जहाज किसी प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जिससे उसमें आग लग गई. हालांकि एजेंसी ने उस जहाज का नाम नहीं बताया.

कच्चे तेल की कीमतों पर कितना असर पड़ा?

हमले की खबर सामने आते ही तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली.

ऑयल बेंचमार्कताजा स्थिति
Brent Crude1.4% तक चढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर
WTI Crudeकरीब 88 डॉलर प्रति बैरल

ब्रेंट क्रूड इससे पहले वाले कारोबारी सत्र में भी छह सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था.

Red Sea इतना अहम क्यों है?

यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब लाल सागर में सीधे तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया है. Red Sea सऊदी अरब के लिए एक अहम तेल निर्यात का रास्ता बन चुका है. इस रास्ते से वह स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को बायपास करके दुनिया के कई देशों तक लाखों बैरल कच्चा तेल भेजता है. ऐसे में इस रूट पर किसी भी तरह का हमला ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर डाल सकता है.

आगे कीमतें और बढ़ सकती हैं?

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव ने पहले ही कच्चे तेल की कीमतों को तेज रफ्तार दी है. इस महीने ब्रेंट क्रूड में करीब 30% की बढ़ोतरी हो चुकी है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा चलता है और सप्लाई में और रुकावट आती है, तो इस साल के अंत तक तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं.

इस बीच क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत भी फिलहाल नहीं दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने लगातार 12वें दिन ईरान पर हमले किए, जबकि तेहरान ने कुवैत पर हमला किया. वहीं, अमेरिका और ईरान दोनों ने निकट भविष्य में शांति वार्ता की संभावना को कम बताया है. ऐसे में बाजार की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं और इसका ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर कितना असर पड़ता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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