तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. खासकर रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी हुई है.
तेल की कीमतों में आई इस तेजी पर अब दुनियाभर के निवेशकों और बाजार की नजर है, क्योंकि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो इसका असर फ्यूल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है.
आखिर तेल की कीमतों में अचानक तेजी क्यों आई?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तब और तेज हो गया जब यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया है. इससे बाजार में यह चिंता बढ़ गई कि तेल की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है. इसी बीच अमेरिका लगातार 12वीं रात ईरान पर हमले कर रहा है. इन घटनाओं ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है.
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कौन से समुद्री रास्ते बने चिंता की वजह?
इस समय बाजार की सबसे बड़ी चिंता दुनिया के दो अहम तेल मार्ग हैं.
| समुद्री रास्ता | क्यों है अहम? |
| स्ट्रेट ऑफ होर्मुज | दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले करीब एक-चौथाई कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है. |
| बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट | रेड सी को गल्फ ऑफ एडन से जोड़ता है. दुनिया के करीब 12% व्यापार और हर साल लगभग 4.1 अरब बैरल तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही इसी रास्ते से होती है. |
इन दोनों रास्तों पर किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि ट्रेडर्स ने तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम को शामिल करना शुरू कर दिया है.
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100 डॉलर के ऊपर जाने का क्या मतलब है?
ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने के बाद अब बाजार की चिंता सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसके असर कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकते हैं.
- फ्यूल की लागत बढ़ सकती है.
- महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है.
- दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसले लेना और मुश्किल हो सकता है.
आगे बाजार किस पर नजर रखेगा?
फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट के हालात पर बनी हुई है. खासकर यह देखा जाएगा कि रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल की सप्लाई सामान्य रहती है या नहीं. अगर तनाव और बढ़ता है या सप्लाई में रुकावट आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
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