Success Story: पंडितजी से एक मुलाकात और बदल गई अनुपम मित्तल की तकदीर, आज होती है करोड़ों में कमाई

Success Story: शादी डॉट कॉम और पीपुल ग्रुप के संस्थापक अनुपम मित्तल आज एक सफल उद्यमी और शार्क टैंक इंडिया के निवेशक के रूप में जाने जाते हैं. लेकिन उनकी यह सफलता रातोंरात नहीं मिली. किशोरावस्था से ही उन्होंने कई अथक प्रयास किए. उन्होंने लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स क्लब, एक्सपोर्ट बिजनेस की शुरुआत की, जिसमें उन्हें नाकामयाबी ही मिली. 25 साल की उम्र में करोड़पति बनने के बाद उन्होंने सब कुछ गंवा दिया. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. पंडितजी से हुई एक बातचीत ने उन्हें शादी डॉट कॉम की नींव रखने की हिम्मत दी. यहीं से उनकी किस्मत बदल गई और आज वे देशभर के युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं.

Success Story: आदमी की किस्मत कब पलटी खा जाए, किसी को पता नहीं चलता. किस्मत की बाजी पलटने पर कोई करोड़पति से खाकपति बन सकता है और कोई खाकपति करोड़पति भी बन सकता है. आज हम एक ऐसे शख्स की बात करने जा रहे हैं, जिसने अपने जीवन में बहुत कुछ खोया. कई प्रकार के कारोबार की शुरुआत की, लेकिन किसी में सफलता हासिल नहीं हुई. सारी कमाई मिट्टी में मिल गई. फिर किस्मत ने पलटी खाई और उन्हें एक पंडितजी से मुलाकात हो गई. इस मुलाकात के दौरान मिले एक आइडिया ने ऐसा धमाल मचाया कि आज वह शख्स साल में करोड़ों रुपये की कमाई कर रहा है. उस शख्स का नाम अनुपम मित्तल है और वे शादी डॉट कॉम के संस्थापक हैं.

अनुपम मित्तल का रहा संघर्षपूर्ण सफर

अनुपम मित्तल आज एक सफल उद्यमी, निवेशक और शादी डॉट कॉम के संस्थापक जरूर हैं, लेकिन उनकी यह यात्रा संघर्षों से भरी रही है. उन्होंने कम उम्र में कई असफलताओं का सामना किया. कभी लाइब्रेरी शुरू की, तो कभी स्पोर्ट्स क्लब और एक्सपोर्ट का काम किया, लेकिन सब बेकार गया. 25 साल की उम्र में करोड़पति बनने के बाद उन्होंने सब कुछ खो दिया. नौकरी चली गई और पैसे खत्म हो गए, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी. यही जिद और सीख आज उन्हें उस मुकाम पर ले गई है, जहां उनकी कहानी देशभर के युवाओं को प्रेरित करती है. आज अनुपम मित्तल एक भारतीय उद्यमी होने के साथ-साथ शादी डॉट कॉम और पीपल्स ग्रुप के संस्थापक होने के साथ-साथ शार्क टैंक इंडिया के निवेशक भी हैं.

शुरुआती असफलताओं से सीख

द इकनॉमिक टाइम्स के रिपोर्ट के अनुसार, अनुपम मित्तल का ये रास्ता आसान नहीं था. किशोरावस्था में उन्होंने घर से ही एक लाइब्रेरी की शुरुआत की थी. लेकिन वह चल नहीं पाई. फिर इसके बाद उनका स्पोर्ट्स क्लब और एक्सपोर्ट का बिजनेस भी असफल रहा. वे पहली बार 25 साल की उम्र में करोड़पति बने, लेकिन थोड़े समय बाद सबकुछ खो बैठे. साल 2001 में डॉट-कॉम क्रैश के दौरान अमेरिका में नौकरी भी चली गई और बचत के पैसे भी खत्म हो गए. उस समय उन्हें ऐसा लगा जैसे जिंदगी “फ्री फॉल” में चली गई हो. लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी .

शादी डॉट कॉम की कैसे की शुरुआत?

उन्होंने बताया कि शादी का आइडिया उन्हें एक पंडितजी से मुलाकात के दौरान आया. पंडितजी ने बताया कि उनकी नेटवर्क सीमित है और इतने से रिश्ते नहीं बन पाते है. यहीं से अनुपम मित्तल को ऑनलाइन मैचमेकिंग का विचार आया. पहले उन्होंने सगाई डॉट कॉम नाम से वेबसाइट की शुरुआत की, जो सफल नहीं हुआ. लेकिन जब इसे शादी डॉट कॉम के नाम से रीब्रांड किया गया, तो धीरे-धीरे पहचान और ग्राहक दोनों बढ़ने लगे. साल 2005 तक कंपनी की आमदनी निवेश से ज्यादा हो गई. मित्तल ने बताया कि एक साल में उनकी कमाई 50 करोड़ रुपये तक होती है.

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एक्शन, धैर्य और सही समय की अहमियत

अनुपम मित्तल बताते हैं कि रास्ता अक्सर “एक्शन” से साफ होता है, न कि केवल लंबे प्लान बनाने से सफलता मिलती है. उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कदम भी आगे का रास्ता दिखाते हैं. बार-बार असफल होने और नौकरी खोने के बाद उन्होंने सीखा कि धैर्य और दोबारा खड़े होना ही सफलता की असली कुंजी है. शार्क टैंक इंडिया पर उनके निवेशों ने यह भी दिखाया कि सही मौके को पहचानकर तुरंत कदम उठाना कितना जरूरी होता है. उनके सहयोग से विंस्टन, होमस्ट्रैप और शर्मा जी का आटा जैसी कंपनियां छोटे स्तर से बढ़कर करोड़ों का कारोबार करने लगीं है.

रिपोर्ट: सौम्या शाहदेव

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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