Global Petrol Prices: दुनियाभर में इस समय तनाव का माहौल है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते विवाद ने वैश्विक तेल सप्लाई को हिलाकर रख दिया है. ‘ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस’ के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद दुनिया के कम से कम 85 देशों में पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं. कच्चा तेल (Brent Crude) भी बीच में 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो अब 90 डॉलर के नीचे आया है.
दुनियाभर में कितनी बढ़ी कीमतें?
तेल की कीमतों में सबसे तगड़ा झटका वियतनाम को लगा है, जहां कीमतें लगभग 50% तक बढ़ गईं. इसके अलावा लाओस में 33% और कंबोडिया में 19% का उछाल देखा गया है. विकसित देशों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया में 18% और अमेरिका में 17% पेट्रोल महंगा हुआ है. चीन और कनाडा जैसे देशों में भी 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, घाना और मोरक्को जैसे कुछ देश ऐसे भी हैं जहां मामूली बढ़त हुई है. इनके अलावा और भी देश जहां तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है.
पड़ोसी देशों का क्या है हाल?
पाकिस्तान की स्थिति काफी गंभीर है. पेट्रोल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है, वहीं बांग्लादेश में तेल की कमी और सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. इन देशों की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते तेल के दामों का सीधा असर पड़ रहा है.
भारत में दाम स्थिर क्यों हैं?
हैरानी की बात यह है कि पूरी दुनिया में मची इस खलबली के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं. 10 मार्च के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. हालांकि, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार बनी हुई है. भारत सरकार अब तक वैश्विक उतार-चढ़ाव का बोझ आम जनता पर पड़ने से रोकने में सफल रही है.
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों को काबू में रखना मुश्किल हो सकता है. फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि कच्चा तेल 90 डॉलर के नीचे आ गया है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है.
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