नयी दिल्लीः केंद्र सरकार ने देश की टेलीकॉम कंपनियों को नसीहत देते हुए कहा है कि दूरसंचार क्षेत्र की कंपनियां जीएसटी का लाभ ग्राहकों को दें. वित्त मंत्रालय ने जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी के तहत कर में छूट का लाभ ग्राहकों को देने के लिए दूरसंचार कंपनियों से लागत को पुनर्गठित करने और कीमत में कमी लाने को कहा है.
इस खबर को भी पढ़ें : 15 जून तक जीएसटी में करा लें माइग्रेशन
वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था (जीएसटी) के तहत दूरसंचार सेवाओं पर 18 फीसदी शुल्क लगेगा. सेवा प्रदाता ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ का दावा कर सकते हैं, जिससे शुल्क का प्रभाव कम होगा. मंत्रालय ने बयान में कहा कि दूरसंचार कंपनियों को अपनी लागत और ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ की उपलब्धता पर फिर से काम करने तथा अपनी कीमतों को पुनर्गठित करने की जरुरत है, ताकि उनकी ‘क्रेडिट’ की उपलब्धता का लाभ उनके ग्राहकों को मिले.
फिलहाल, दूरसंवार सेवाओं पर 14 फीसदी सेवा कर के साथ स्वच्छ भारत उपकर तथा कृषि कल्याण उपकर 0.5 फीसदी लगता है. वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, इसके विपरीत दूरसंचार सेवाओं पर जीएसटी व्यवस्था में 18 फीसदी जीएसटी लगेगा. यह शुद्ध रूप से मूल्य वर्द्धित कर है, क्योंकि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा कारोबार के दौरान इस्तेमाल कच्चे माल पर पूर्ण रूप से ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ उपलब्ध होगा.
बयान में कहा गया है कि फिलहाल दूरसंचार सेवा प्रदाता न वस्तुओं पर दिये गये वैट और न ही आयातित वस्तुओं : उपकरणों पर विशेष अतिरिक्त शुल्क (एसएडी) के क्रेडिट के हकदार हैं. हालांकि, जीएसटी के तहत वे घरेलू स्तर पर खरीदे गये सामान के साथ आयातित वस्तुओं पर किये गये आईजीएसटी भुगतान के एवज में ‘क्रेडिट’ प्राप्त करेंगे. मंत्रालय के अनुसार, कुछ अनुमान के तहत अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) दूरसंचार उद्योग के कारोबार का 2 फीसदी होगा.
