50 रुपये का सर्टिफिकेट बचाएगा जेल जाने से, गाड़ीवाले आज ही बनवा लें

मोटर वाहन वाहन वाले लोग सिर्फ ₹50 से ₹100 तक खर्च करके बनवाएं प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC Certificate) और बचें ₹10,000 जुर्माने व 6 महीने की जेल से. जानें प्रक्रिया, कीमत और जरूरी दस्तावेज

By Rajeev Kumar | January 4, 2026 4:18 PM

PUC Certificate: भारत में वाहन चलाते समय प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) रखना अब सिर्फ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि आपकी जेब और आजादी दोनों की सुरक्षा है. महज ₹50 खर्च करके आप ₹10,000 तक के जुर्माने और छह महीने की जेल से बच सकते हैं. मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध PUC के गाड़ी चलाना गंभीर अपराध माना जाता है और कई शहरों में इस नियम को बेहद सख्ती से लागू किया जा रहा है.

कानून क्या कहता है?

मोटर वाहन अधिनियम, 1993 की धारा 190(2) के अनुसार यदि कोई वाहन बिना वैध PUC प्रमाणपत्र के सड़क पर पकड़ा जाता है तो चालक पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल भी हो सकती है और ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है.

कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी?

वाहन चलाते समय आपके पास चार अहम दस्तावेज होना अनिवार्य है –

  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
  • इंश्योरेंस पेपर
  • प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC)

इन दस्तावेजों को आप डिजीलॉकर में सुरक्षित रख सकते हैं या हार्ड कॉपी साथ रख सकते हैं.

PUC Certificate की कीमत और वैधता क्या है?

PUC प्रमाणपत्र बनवाने या उसका नवीनीकरण कराने में ₹50 से ₹100 तक का खर्च आता है. यह प्रमाणपत्र वाहन के प्रदूषण स्तर को दर्शाता है और इसे समय-समय पर रिन्यू कराना जरूरी होता है. आमतौर पर यह सर्टिफिकेट कुछ महीनों के लिए वैध होता है और उसके बाद दोबारा जांच करानी पड़तीहै.

कहां और कैसे बनवाएं?

PUC बनवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है. अपने नजदीकी पेट्रोल पंप पर जाएं, जहां प्रदूषण जांच केंद्र मौजूद होता है. वहां वाहन की जांच कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और आपको तुरंत नया प्रमाणपत्र मिल जाता है.

पर्यावरण और आपकी सुरक्षा

PUC सिर्फ कानूनी बचाव का साधन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी अहम है. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करता है कि आपका वाहन हवा में जहरीले धुएं का स्तर तय सीमा से अधिक न छोड़े. इस तरह यह आपके स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है.

यह भी पढ़ें: इनोवा, स्कॉर्पियो को भूल जाइए, ये है देश की सबसे सस्ती 14-सीटर कार, बड़े परिवार के लिए बेस्ट

यह भी पढ़ें: कितने समय के बाद बदल देना चाहिए कार का टायर? इन आसान तरीकों से तुरंत पता लगाएं