Diwali में क्या आपने भी Google पर सर्च किये ये वीडियो? हो सकती है जेल

Google Ban Video Diwali - अगर आपने दिवाली पर भारत में प्रतिबंधित वीडियोज को गूगल पर सर्च किया है, तो आपको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. आइए जानते हैं वो कौन सी चीजें हैं, जिसे गूगल पर सर्च करना मना है-

Google Search Ban Video: दिवाली का त्योहार भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग दीप जलाते हैं, मिठाइयां बांटते हैं, पटाखे फोड़ते हैं और खुशी मनाते हैं. लेकिन दिवाली पर की गई आपकी एक गलती आपको खुशियों के आंगन से उठाकर जेल तक पहुंचा सकती है. जी हां, अगर आपने दिवाली पर भारत में प्रतिबंधित वीडियोज को गूगल पर सर्च किया है, तो आपको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. आइए जानते हैं वो कौन सी चीजें हैं, जिसे गूगल पर सर्च करना मना है-

बम कैसे बनाएं?

सबसे पहले यह जान लें कि भारत में बम बनाना प्रतिबंधित है. इसके लिए लाइसेंस की जरूरत पड़ती है. लेकिन दिवाली के मौके पर गैरकानूनी तरीके से बम बनाने का धंधा खूब जोर पकड़ता है. इस धंधे में नये लोग बम बनाने के लिए गूगल का सहारा भी लेते हैं. यह हमारे देश में प्रतिबंधित है. अगर आपने गूगल से बम बनाने की ट्रेनिंग ली है, और गूगल इसकी जानकारी पुलिस को दे देती है, तो आपको जेल भी हो सकती है.

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बारूद की खरीद कहां से करें?

बम बनाने के लिए बारूद सबसे जरूरी होता है. बारूद एक विस्फोटक पदार्थ होता है, जो आसानी से नहीं मिलता है. ऐसे में कई लोग गूगल सर्च पर बारूद खरीदने का पता भी लगाते हैं. यह काम भी गैरकानूनी होता है. ऐसे में ऑनलाइन बारूद खरीदने और पेंमेंट करने पर आपके खिलाफ पुलिस एक्शन ले सकती है.

बंदूक कैसे बनाएं?

बंदूक बनाना भी हमारे देश में प्रतिबंधित है. दिवाली के दौरान देसी कट्टे की मांग बढ़ जाती है. यही नहीं, दिवाली पर कई दूसरे खतरनाक खिलौने बनाने का धंधा भी जोर पकड़ लेता है. देसी कट्टा और दूसरे आग्नेयास्त्र बनाने का सबसे आसान तरीका जानने के लिए लोग गूगल बाबा की शरण में जाते हैं. लेकिन गन बनाने के तरीके सर्च करनेवालों पर गूगल नजर रखता है. ऐसे में पुलिस आपको पकड़कर पूछताछ कर सकती है.

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Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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