सनरूफ, ADAS और टचस्क्रीन... भारतीय सड़कों के लिए ये फीचर्स कितने काम के और कितने खतरनाक?

नई कार खरीदते समय लोग सनरूफ, ADAS और बड़ी टचस्क्रीन जैसे फीचर्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. लेकिन क्या ये फीचर्स भारतीय सड़कों और मौसम के हिसाब से वाकई फायदेमंद हैं, या सिर्फ दिखावा? जानिए विस्तार से.

आजकल नई कार खरीदते समय लोग इंजन या माइलेज से ज्यादा कार के फीचर्स पर ध्यान देते हैं. कार कंपनियां भी सनरूफ, ADAS और बड़ी टचस्क्रीन जैसे फीचर्स को खूब प्रमोट कर रही हैं. लेकिन क्या यह फीचर्स भारतीय सड़कों और यहां के मौसम के हिसाब से वाकई काम के हैं या सिर्फ दिखावा हैं? आइए इनके बारे में इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताते हैं. 

सनरूफ: स्टाइल का शौक या खतरा?

भारतीय खरीदारों के बीच सनरूफ का क्रेज सबसे ज्यादा है. लोग इसे स्टेटस सिंबल मानते हैं. हालांकि भारत के मौसम को देखें तो साल के ज्यादातर महीनों में तेज गर्मी रहती है. ऐसे में सनरूफ का पर्दा खोलते ही केबिन बहुत तेजी से गर्म होता है, जिससे एसी पर दबाव बढ़ता है. इसका असली फायदा सिर्फ सुहावने मौसम या पहाड़ी इलाकों में ही मिलता है.

सबसे बड़ी समस्या इसका गलत इस्तेमाल है. अक्सर लोग कार चलती हुई स्थिति में बच्चों को सनरूफ से बाहर निकाल देते हैं. अचानक ब्रेक लगने या किसी दुर्घटना की स्थिति में यह डेंजरस साबित हो सकता है. ट्रैफिक पुलिस इसके लिए चालान भी काटती है. सनरूफ केवल हवा के वेंटिलेशन और रोशनी के लिए है, बाहर निकलने के लिए नहीं.

ADAS: स्मार्ट तकनीक या कंफ्यूजन?

एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम एक बहुत ही मॉडर्न सुरक्षा फीचर है. यह कार के आसपास लगे कैमरे और रडार की मदद से काम करता है. अगर सामने कोई पैदल यात्री या गाड़ी आ जाए, तो यह ड्राइवर को चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर खुद ही इमरजेंसी ब्रेक लगा देता है. 

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लेकिन, भारतीय सड़कों पर जहां लेन मार्किंग सही नहीं होती, लोग अचानक कट मारते हैं और जानवर सड़कों पर आ जाते हैं, वहां यह सिस्टम कई बार कंफ्यूज हो जाता है. कई बार अचानक ब्रेक लगने से पीछे से आ रही गाड़ी के टकराने का खतरा रहता है. लोग इसे ऑटोपायलट समझकर स्टीयरिंग से हाथ हटा लेते हैं, जो कि बहुत खतरनाक है. एडीएएस (ADAS) ड्राइवर की मदद के लिए है, उसकी जगह लेने के लिए नहीं.

टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट: सुविधा या ध्यान भटकने का कारण?

आजकल कारों में 10 से 15 इंच तक के बड़े टचस्क्रीन पैनल आ रहे हैं. इससे कार का डैशबोर्ड बहुत प्रीमियम लगता है और नेविगेशन देखने में आसानी होती है. लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत फिजिकल बटन का खत्म होना है.

एसी (AC) का तापमान बदलने या म्यूजिक का वॉल्यूम कम करने के लिए भी ड्राइवर को स्क्रीन पर देखना पड़ता है. तेज रफ्तार में स्क्रीन की तरफ एक सेकंड का भी ध्यान भटकना बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है. इसके अलावा तेज धूप में स्क्रीन पर चमक पड़ने से देखना मुश्किल होता है और सिस्टम हैंग होने पर कई जरूरी कंट्रोल काम करना बंद कर देते हैं.

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तीनों फीचर्स का ध्यान रखना जरूरी 

यह तीनों फीचर्स कार चलाने के अनुभव को बेहतर बनाते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल समझदारी और सतर्कता के साथ करना बेहद जरूरी है.


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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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