आदिवासी साहित्य के लिए आदिवासी दर्शन जानना जरूरी : शिशिर

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आदिवासी साहित्य के लिए आदिवासी दर्शन जानना जरूरी : शिशिर

रांची: लेखक-पत्रकार शिशिर टुडू ने कहा कि आदिवासी साहित्य को परखने के लिए आदिवासी दर्शन को जानना जरूरी है़ आदिवासियों में अपने अस्तित्व की गहरी समझ है़ इनके दर्शन के अनुसार मनुष्य इस विशाल सृष्टि का एक छोटा सा हिस्सा भर है़ हमारा अधिकांश साहित्य गीतों व लोक कथाओं में है़ कई बार हमारे साहित्यकारों […]

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रांची: लेखक-पत्रकार शिशिर टुडू ने कहा कि आदिवासी साहित्य को परखने के लिए आदिवासी दर्शन को जानना जरूरी है़ आदिवासियों में अपने अस्तित्व की गहरी समझ है़ इनके दर्शन के अनुसार मनुष्य इस विशाल सृष्टि का एक छोटा सा हिस्सा भर है़ हमारा अधिकांश साहित्य गीतों व लोक कथाओं में है़ कई बार हमारे साहित्यकारों को मुख्यधारा की कसौटी पर कसा जाता है और कमतर आंका जाता है़. वह रविवार को देश की पहली महिला आदिवासी कथाकार ‘एलिस एक्का की कहानियों का संग्रह’ व संस्कृतिकर्मी वंदना टेटे की पुस्तक ‘आदिवासी दर्शन और साहित्य’ के लोकार्पण के मौके पर बोल रहे थे़ यह आयोजन अखड़ा की ओर से सूचना भवन सभागार में हुआ़

साठ के दशक में लिखी सधी हुई कहानियां : उपन्यासकार विनोद कुमार ने कहा कि आदिवासी समाज में गद्यात्मक लेखन के प्रति वैसा रुझान नहीं है, पर साठ के दशक में ही एलिस एक्का सधी हुई कहानियां लिख रही थी़ं उन्होंने समाज और परिवेश को अपनी छोटी कहानियों में समेटने का कठिन कार्य किया है़ उनकी कहानियों में आदिवासी समाज के सुख-दुख, उल्लास-आनंद और भविष्य के प्रति आशावादिता नजर आती है़ क्रमिक बदलाव भी झलकता है़ डॉ माया प्रसाद ने कहा कि अपनी विरासत को सहेजना जरूरी है़ एलिस एक्का ने अपने समाज को लोगों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया था़ फादर पीटर पॉल ने कहा कि एलिस एक्का की आपबीती, अनुभवों से निकली कहानियां दिल को सुकून देती है़ं गोस्सनर कॉलेज के प्राचार्य डॉ सिद्धार्थ एक्का ने भी विचार रखे़ इससे पूर्व दोनों पुस्तकों की संपादक वंदना टेटे ने कहा कि एलिस एक्का हमारी विरासत है़ं उनका लेखन और पचास के दशक से हिंदी साहित्य में उनकी उपस्थिति इस मिथ को तोड़ती हैं कि आदिवासियों ने हाल के दिनों में लिखना शुरू किया है़ अश्वनी कुमार पंकज ने धन्यवाद ज्ञापन किया़

कार्यक्रम में साहित्यकार विद्याभूषण, टीएससी सदस्य रतन तिर्की, कवयित्री अणिमा बिरजिया, रेमिस कंडुलना, जोआकिम तोपनो, महादेव टोप्पो, जसिंता केरकेट्टा, आलोका, अरविंद अविनाश, डॉ सुनीता, आनंद जोसेफ तिग्गा, शेषनाथ बर्णवाल, अविनाश बाड़ा, मेनका तिर्की, ऋषि एक्का, संजय भालोटिया, डॉ सुनीता, महेश मांझी, डाॅ अर्चना कुमारी, सविता मुंडा, विद्यासागर, खातिर हेमरोम, जान कंडुलना व अन्य मौजूद थे़

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