USS Abraham Lincoln in Middle East: ईरान में पिछले एक हफ्ते से थमी हलचल फिर एक बार शुरू हो सकती है. अमेरिका का विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन तीन सहयोगी युद्धपोतों के साथ अरब सागर में पहुंच चुका है. अब यह मिडिल ईस्ट के पास तैनात किया गया है. इस कदम के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई सख्त सैन्य फैसला ले सकते हैं. हालांकि, मिडिल ईस्ट के देश युद्ध के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं. पिछली बार जब अमेरिका अपनी कार्रवाइयों के मुहाने पर खड़ा था, तभी चार अरब देशों ने हमला न करने की अपील की थी. लेकिन इस ताजा अपडेट ने भविष्य के घटनाक्रम का अंदेशा जता दिया है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि यह स्ट्राइक ग्रुप फिलहाल क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से तैनात है. अधिकारियों के मुताबिक, यह तैनाती अमेरिका की उस क्षमता को भी दिखाती है, जिसके तहत वह अपने सैनिकों और हितों की रक्षा कर सकता है. हालांकि, सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि यह युद्धपोत समूह अभी हिंद महासागर में है, न कि अरब सागर में. ईरान और पर्शियन गल्फ अरब सागर के करीब है. इस एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ इस इलाके में हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को भी भेजा जा रहा है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की नौसेना द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया है कि बोइंग का F/A-18E सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान हिंद महासागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन पर उतर रहा है. इस तैनाती की गंभीरता को दर्शाता है. इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका का एक ‘बड़ा नौसैनिक बेड़ा’ ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन उनकी उम्मीद है कि हालात ऐसे न बनें कि उसका इस्तेमाल करना पड़े. ट्रंप ने इसे सिर्फ एहतियाती कदम बताया था.
ईरान में विरोध प्रदर्शन के बाद बढ़ा US के साथ तनाव
ईरान में जब विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई तेज हुई, तभी अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया. ईरान में 28 दिसंबर से आर्थिक मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू हुए थे, जो लगभग 18 जनवरी तक चले. इस दौरान अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5000-12000 लोगों के मारे जाने की खबर दी गई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं में अब तक 3,117 लोगों की मौत हो चुकी है. इन प्रदर्शनों के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के खिलाफ भी नारेबाजी हुई. फिर खबरें सामने आईं कि ईरान 800 लोगों को फांसी देने वाला हे.
क्या US-Iran युद्ध होगा?
इसी के बाद अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र से युद्धपोतों को आगे बढ़ाना शुरू किया. ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जारी रही तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है, हालांकि बाद में प्रदर्शनों की तीव्रता कम होती दिखी. इसी के साथ, हाल के दिनों में ट्रंप ने भी अपने रुख में कुछ नरमी दिखाई है. उन्होंने कहा कि जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक अब हिंसा में कमी आई है और फिलहाल बड़े पैमाने पर फांसी जैसी कार्रवाइयों की कोई योजना नहीं है.
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