US India Trade Talks: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि भारत और अमेरिका लंबे समय से अटकी हुई व्यापार वार्ता को दोबारा शुरू कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “अच्छा मित्र” बताते हुए भरोसा जताया कि दोनों देश जल्द ही व्यापार विवादों का समाधान निकाल लेंगे. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए वार्ता जारी है. मुझे विश्वास है कि दोनों महान देशों के लिए यह बातचीत सफल निष्कर्ष तक पहुंचेगी. मैं अपने बहुत अच्छे दोस्त पीएम मोदी से आने वाले हफ्तों में बातचीत करने का इंतजार कर रहा हूं.” हालांकि अभी व्हाइट हाउस या भारत के कॉमर्स मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
तनावपूर्ण इतिहास
भारत-अमेरिका व्यापारिक विवादों की शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल से हुई. 2018 में अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय स्टील और एल्युमीनियम पर शुल्क लगाया. इसके जवाब में भारत ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ बढ़ा दिया. 2019 में अमेरिका ने भारत का जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) दर्जा खत्म कर दिया. इससे भारत के छह अरब डॉलर से ज्यादा के उत्पादों की अमेरिकी बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच बंद हो गई. तनाव के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हुई है. 2024 में यह 192 अरब डॉलर तक पहुंचा. अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. फिर भी डिजिटल ट्रेड, डेटा लोकलाइजेशन, कृषि उत्पादों और मेडिकल डिवाइसों पर अमेरिकी शुल्क जैसे मुद्दों पर समझौता अब तक नहीं हो सका है.
US India Trade Talks: ट्रंप की बदलती बोली
हाल में ट्रंप ने भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर कड़ा रुख अपनाया था. उन्होंने यहां तक कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था “मृतप्राय” है और अमेरिका “भारत को चीन के हाथों खो चुका है.” लेकिन बाद में ट्रंप ने रुख नरम करते हुए पीएम मोदी को “बहुत अच्छे मित्र” बताया. उन्होंने कहा, “मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा. वे शानदार प्रधानमंत्री हैं. भारत और अमेरिका के रिश्ते खास हैं. चिंता की कोई बात नहीं.”
पीएम मोदी ने भी ट्रंप के सकारात्मक बयान का स्वागत किया और कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं की सराहना करता हूं और पूरी तरह उनका प्रत्युत्तर देता हूं. भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी बेहद सकारात्मक और भविष्य की ओर देखने वाली है.”
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टकराव की जड़
ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ बढ़ा दिया था. उनका आरोप था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जबकि चीन को इससे जुड़ी कोई सख्ती नहीं झेलनी पड़ रही. भारत ने इसे “अनुचित” बताते हुए पलटवार किया और कहा कि चीन, भारत से कहीं ज्यादा मात्रा में रूस से तेल आयात करता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान भारतीय-अमेरिकी वोटरों को साधने की रणनीति भी है. 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले यह एक अहम राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. भविष्य की वार्ता में GSP बहाली, टैरिफ में कमी, ई-कॉमर्स नियमन और सेमीकंडक्टर सहयोग जैसे मुद्दे केंद्र में हो सकते हैं.
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