US fighter Jet Crash Iran: ईरान में एक अमेरिकी विमान को ‘मार गिराये’ जाने के बाद चालक दल के एक सदस्य को बचा लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश अब भी जारी है. अमेरिकी एवं इजरायली अधिकारियों ने यह जानकारी दी. यह अमेरिकी वायु सेना का एक एफ-15ई विमान था. इस घटनाक्रम से अवगत तीन अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि यह बचाव ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी सेना तलाश एवं बचाव अभियान चला रही थी. इजरायल इस तलाश एवं बचाव अभियान में अमेरिका की मदद कर रहा है.
पेंटागन और व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को पेंटागन (अमेरिका रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय) से प्राप्त एक ईमेल के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसे पश्चिम एशिया में ‘‘एक विमान को मार गिराए जाने’’ की सूचना मिली थी. ईमेल में इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई. अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस घटनाक्रम के बारे में जानकारी दे दी गई है, लेकिन उन्होंने इससे अधिक कोई और ब्यौरा नहीं दिया.
इस घटना के बाद, होर्मुज स्ट्रेट के पास एक और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. यह फेयरचाइल्ड रिपब्लिक ए-10 थंडरबोल्ट II या ए-10 वॉर्थोग हमलावर विमान भी कहा जाता है. अमेरिका और इजरायल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने इजराइल और अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर दबाव बनाए रखा है.
यह पहली बार है जब अमेरिका ने ईरानी क्षेत्र में कोई विमान खोया है. इससे पांच सप्ताह पहले शुरू हुए युद्ध के दायरे में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है. आईआरजीसी ने दावा किया था यह विमान उसने ही मार गिराया है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विमान को मार गिराया गया या वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ.
पायलट ने कूदकर जान बचाई, ईरान ने रखा ईनाम
इससे पहले, ईरानी सरकारी टेलीविजन से जुड़े एक चैनल ने शुक्रवार को दावा किया कि एक अमेरिकी लड़ाकू पायलट दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर एक विमान से कूद गया. ईरानी चैनल के एंकर ने लोगों से आग्रह किया था कि वे किसी भी ‘दुश्मन पायलट’ को पुलिस के हवाले कर दें और ऐसा करने वाले व्यक्ति को इनाम दिया जाएगा. यह चैनल कोहकिलौयेह और बोयर-अहमद प्रांत में स्थित है, जो एक बेहद ग्रामीण और पहाड़ी इलाका है तथा 15,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है.
आसपास के इलाकों में भी तलाश तेज
अधिकारियों ने जनता से पड़ोसी प्रांत चहारमहल और बख्तियारी में भी पायलट की तलाश करने का आग्रह किया था. इससे पहले, टीवी स्क्रीन पर लोगों से आग्रह किया गया कि ‘‘अगर वे दिखें, तो गोली मार दें.’’ यह बात सोशल मीडिया पर जारी उन वीडियो फुटेज के संदर्भ में कही गई, जिसमें उस इलाके में अमेरिकी विमान जैसा दिखने वाला विमान नजर आता है.
मलबा दिखाया गया, लेकिन पुष्टि नहीं
चैनल ने घोषणा करते समय एक ट्रक के पिछले हिस्से में धातु का मलबा दिखाया, लेकिन तत्काल कोई अन्य विवरण नहीं दिया. पूरे युद्ध के दौरान, ईरान ने दुश्मन विमानों को मार गिराने के बारे में कई दावे किए, जो बाद में सच साबित नहीं हुए. शुक्रवार को पहली बार ऐसा हुआ जब ईरान ने टेलीविजन पर आकर जनता से एक संदिग्ध पायलट को खोजने की अपील की.
खाड़ी क्षेत्र में हमले और बढ़ा तनाव
इस बीच, ईरान ने शुक्रवार को समूचे पश्चिम एशिया में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे कुवैत में समुद्री पानी को पेयजल में बदलने वाला एक विलवणीकरण संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया और एक रिफाइनरी में आग लग गई. वहीं, अमेरिका और इजराइल ने हवाई हमले कर तेहरान को निशाना बनाया.
बातचीत की संभावना भी बनी
इस बात के संकेत के तौर पर कि ईरान की धर्म-आधारित शासन व्यवस्था का एक हिस्सा बातचीत के लिए तैयार हो सकता है, देश के पूर्व शीर्ष राजनयिक ने एक प्रभावशाली अमेरिकी पत्रिका में संघर्ष को समाप्त करने का एक प्रस्ताव प्रकाशित किया है.
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा
खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर ईरान के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी मजबूत पकड़ ने शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल मचा दी है, तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है और भोजन सहित कई बुनियादी चीज़ों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि शांतिकाल में दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन का पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है.
जरीफ का शांति प्रस्ताव
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने शुक्रवार को लिखा कि अब दोनों पक्षों की तकलीफों को खत्म करने का समय आ गया है. जरीफ पश्चिमी देशों के साथ बातचीत का लंबा अनुभव रखने वाले एक मंझे हुए राजनयिक हैं और ईरानी नेतृत्व के एक व्यावहारिक खेमे के करीब माने जाते हैं. उन्होंने ‘फॉरेन अफेयर्स’ पत्रिका में लिखा, ‘लंबे समय तक चलने वाली शत्रुता से कीमती जानें और अमूल्य संसाधन कहीं ज्यादा बर्बाद होंगे.’
युद्ध का असर और बढ़ता दायरा
तेहरान और वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत कर रहे थे, तभी 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने बमबारी शुरू कर दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब अमेरिका ने उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान हमला किया है.
हमलों के क्रम में ईरान ने कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया. सरकारी स्वामित्व वाली कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि दमकलकर्मी कई जगहों पर लगी आग को बुझाने का काम कर रहे हैं. कुवैत ने यह भी कहा कि ईरान के हमले से एक विलवणीकरण संयंत्र को ‘काफी नुकसान’ पहुंचा है.
क्षेत्रीय असर: बहरीन से UAE तक
कुवैत के साथ ही बहरीन में भी सायरन बजने की आवाज सुनाई दी. वहीं, सऊदी अरब ने कहा कि उसने ईरान के कई ड्रोन नष्ट कर दिए. उधर, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने एक गैस क्षेत्र को बंद कर दिया, क्योंकि एक मिसाइल को रोके जाने के बाद उसका मलबा उस पर गिरा और आग लग गई.
ईरान के शहरों में भी हमले
कार्यकर्ताओं ने ईरान की राजधानी तेहरान और मध्य शहर इस्फहान के आसपास हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि किस चीज को निशाना बनाया गया. इससे एक दिन पहले ईरान ने कहा था कि अमेरिका ने एक बड़े पुल पर हमला किया, जो अभी निर्माणाधीन था और इस हमले में आठ लोगों की मौत हो गई.
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भारी जनहानि और विस्थापन
युद्ध के दौरान ईरान में 1,900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. इजरायल में 19 लोगों के मारे जाने की खबर है. खाड़ी देशों और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए हैं. वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्ला के खिलाफ इजरायल के जमीनी अभियान में 1,300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं.
UNSC में बड़ा प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के शनिवार को बहरीन के एक प्रस्ताव पर मतदान करने की उम्मीद है, जो जहाजों का होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरना सुनिश्चित करने के लिए रक्षात्मक कार्रवाई को अधिकृत करेगा. बहरीन के प्रारंभिक मसौदे में देशों को जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए ‘‘सभी आवश्यक उपकरणों का उपयोग’’ करने की अनुमति देने की बात कही गई थी, लेकिन वीटो शक्ति प्राप्त रूस, चीन और फ्रांस ने शक्ति के इस्तेमाल की मंजूरी देने का विरोध किया.
