Tulsi Gabbard Political Career: अमेरिकी खुफिया व्यवस्था और राजनीति से जुड़े मामलों में पूर्व नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. द वॉशिंगटन पोस्ट की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गबार्ड के राजनीतिक कामकाज और सार्वजनिक रुख पर हवाई स्थित साइंस ऑफ आइडेंटिटी फाउंडेशन (SIF) से जुड़े लोगों का लंबे समय तक प्रभाव रहा. रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब गबार्ड ने खुफिया प्रमुख के पद से अपना कार्यकाल खत्म किया है और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में खुफिया विभाग के ढांचे में बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं.
द वॉशिंगटन पोस्ट की जांच करीब 25,000 पन्नों के आंतरिक दस्तावेजों और ईमेल पर आधारित बताई गई है. ये दस्तावेज रेबेका साल्ट्जबर्ग ने उपलब्ध कराए, जो पहले गबार्ड के चुनाव अभियान से जुड़ी थीं और SIF से भी उनका संबंध रहा था. रिपोर्ट के अनुसार, इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि क्रिस बटलर के करीबी सहयोगियों ने गबार्ड के सलाहकारों के साथ मिलकर उनके सार्वजनिक बयानों, नीतिगत रुख और कांग्रेस में रणनीति को प्रभावित करने का काम किया.
गबार्ड के बयानों और दस्तावेजों में समानता का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया कि SIF से जुड़े दस्तावेजों में मौजूद कुछ सुझाव बाद में गबार्ड के राजनीतिक काम और बयानों में दिखाई दिए. एक उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि एक ईमेल में लिखा था, ‘सुबह इसकी शुरुआत कर दो’, जिसमें उन देशों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की बात कही गई थी, जिनके नागरिक इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के साथ शामिल हुए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके करीब एक सप्ताह बाद गबार्ड ने कांग्रेस में इसी विषय से जुड़ा एक विधेयक पेश किया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सीरिया जैसे संवेदनशील विदेश नीति मुद्दों पर तैयार किए गए संदेश बाद में गबार्ड के इंटरव्यू और कांग्रेस बहस में दिखाई दिए.
सोशल मीडिया समर्थन को लेकर भी दावा
जांच रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि बटलर समर्थकों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स गबार्ड की राजनीतिक छवि को मजबूत करने के लिए सक्रिय थे. एक पोस्ट में लिखा गया था, ‘DNI गबार्ड एक सच्ची देशभक्त हैं और उनकी कमी महसूस होगी.’ रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2016 के बीच जब गबार्ड कांग्रेस सदस्य थीं, तब उनके कई तर्क SIF से जुड़े दस्तावेजों में मौजूद बातों से मिलते-जुलते थे.
क्रिस बटलर और SIF को लेकर विवाद
78 वर्षीय क्रिस बटलर हवाई स्थित साइंस ऑफ आइडेंटिटी फाउंडेशन के संस्थापक हैं. यह संगठन 1970 के दशक में स्थापित हुआ था और योग आधारित आध्यात्मिक विचारों से जुड़ा है. हालांकि, संगठन को लेकर लंबे समय से विवाद भी रहे हैं. कुछ पूर्व सदस्यों ने आरोप लगाया है कि संगठन में सख्त पदानुक्रम व्यवस्था थी और बटलर का अनुयायियों के जीवन और फैसलों पर काफी प्रभाव था.
एक पूर्व सदस्य ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा, ‘मुझे इस विश्वास के साथ बड़ा किया गया कि क्रिस बटलर धरती पर भगवान की आवाज हैं. अगर आप उनसे सवाल करते थे या उन्हें नाराज करते थे, तो ऐसा माना जाता था कि आप भगवान का अपमान कर रहे हैं.’
एक अन्य पूर्व सहयोगी ने दावा किया, ‘वह आध्यात्मिक नेतृत्व से आगे बढ़कर दुनिया पर शासन करने की इच्छा रखते थे.’ कुछ पूर्व सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया कि बटलर अमेरिकी खुफिया और रक्षा संस्थानों की आलोचना करते थे और उन्हें ‘पागल लोग’ कहते थे.
गबार्ड के प्रवक्ता ने आरोपों को किया खारिज
इन आरोपों के बाद तुलसी गबार्ड के प्रवक्ता ने रिपोर्ट के दावों को खारिज कर दिया. वहीं, बटलर के करीबी लोगों ने भी कहा कि संबंधित निर्देश उन्होंने नहीं लिखे थे. उनके सहयोगी सुनील खेमानी ने इसकी जिम्मेदारी लेने का दावा किया. हालांकि, वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि 173 पन्नों के एक दस्तावेज के विश्लेषण में ऐसे व्यक्तिगत और जीवन से जुड़े विवरण मिले, जो सीधे बटलर की ओर संकेत करते हैं.
गबार्ड ने जाते-जाते कोविड के बारे में किया खुलासा
तुलसी गबार्ड के ऊपर यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं, जब उन्होंने कोविड वायरस को लेकर बड़े खुलासे किए हैं. 19 जून को अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस पद से रिटायरमेंट से पहले तुलसी गबार्ड ने कई ऐसे दस्तावेज और बातचीत सार्वजनिक की हैं, जिनसे उनके अनुसार कोविड की उत्पत्ति से जुड़े विवाद में अमेरिकी राष्ट्रपति के पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फौसी की भूमिका का पता चलता है. हालांकि, सीएनएन ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि गबार्ड के आरोपों और डॉक्यूमेंट में समानता नहीं है.
DNI कार्यालय में शुरू हुआ बड़ा बदलाव
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कार्यवाहक नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के कार्यालय में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की कटौती की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार से इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई और गबार्ड के करीबी माने जाने वाले कई राजनीतिक नियुक्त अधिकारियों को शुरुआती चरण में हटाया गया. हालांकि, कर्मचारियों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया.
वहीं, गबार्ड के कार्यकाल के दौरान DNI कार्यालय में लगाए गए उनके कई पोर्ट्रेट भी हटा दिए गए हैं. सीएनएन के अनुसार, ये तस्वीरें उनके पति, जो पेशेवर फोटोग्राफर हैं, ने खींची थीं और सोमवार तक सभी हटा दी गईं. गबार्ड ने अपने पति के दुलर्भ कैंसर की बीमारी का हवाला देकर ही इस्तीफा दिया था.
ये भी पढ़ें:- ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच होगी… वरना बातचीत रद्द कर देता, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर फंसाया पेंच
ये भी पढ़ें:- ‘ट्रंप की शक्तियों’ पर US सीनेट का प्रहार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, क्या फर्क पड़ेगा?
विलियम पुल्टे को मिली जिम्मेदारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गबार्ड के इस्तीफे के बाद विलियम पुल्टे को कार्यवाहक नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर नियुक्त किया है. रिपोर्ट के अनुसार, पुल्टे ने पद संभालने से पहले ही कार्यालय के सभी कर्मचारियों की सूची मांगी थी.
इसके बाद उन्होंने बड़े स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की. पुल्टे फिलहाल 18 अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी कर रहे हैं. हालांकि, उनकी नियुक्ति के बाद ट्रंप प्रशासन के भीतर भी हलचल हुई और कई सलाहकारों में असहमति सामने आई है.
