US Iran War Kharg Island: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के खार्ग आईलैंड स्थित तेल निर्यात केंद्र पर आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है. शनिवार को एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में द्वीप के ज्यादातर तेल ढांचे को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ‘मजे के लिए इसे कुछ और बार निशाना बना सकता है.’ डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों के कारण अक्सर निशाना बनते हैं. इस बार भी उनका ऐसा बयान सामने आया है. इस युद्ध में पूरे मिडिल ईस्ट में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. खुद अमेरिका के भी 6-13 सैनिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान…
ईरान के खार्ग आईलैंड स्थित तेल निर्यात से जुड़ा ढांचा काफी हद तक सुरक्षित माना जाता है, लेकिन शनिवार को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वास्तव में इस द्वीप पर हमला किया है. इसे उन्होंने ईरान के तेल व्यापार का अहम केंद्र बताया. राष्ट्रपति का दावा है कि अमेरिकी बलों ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों को ‘पूरी तरह तबाह’ कर दिया है. फारस की खाड़ी में स्थित यह जगह अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ईरान के कच्चे तेल की आपूर्ति का मुख्य प्रवेश द्वार मानी जाती है.
हालांकि, हालिया हमलों में तेल टर्मिनल सीधे निशाने पर नहीं थे, लेकिन ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली समुद्री आवाजाही में बाधा डालता है, तो ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है. ईरान के तट से करीब 30 किलोमीटर दूर बुशेहर के पास स्थित खार्ग द्वीप को देश की आर्थिक जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि इसी के जरिए ईरान अपने लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात करता है.
ये भी पढ़ें:- US-इजरायल अटैक से पहले अली खामेनेई बंकर में क्यों नहीं गए? पूर्व सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने खोला राज
ये भी पढ़ें:- ईरान के ‘शाहेद’ की कॉपी कर अमेरिका ने बनाया ‘लुकास’, सुपरपॉवर US ने ‘चीन वाला धंधा’ क्यों अपनाया?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में मिसाइल भंडारण स्थलों और कई रक्षा प्रतिष्ठानों सहित कई लक्ष्यों को निशाना बनाया गया. बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने उन देशों से भी अपील की है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल प्राप्त करते हैं कि वे इस अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘दुनिया के वे देश जो होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल प्राप्त करते हैं, उन्हें इस मार्ग की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और हम इसमें उनकी काफी मदद करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका इन देशों के साथ समन्वय भी करेगा ताकि यह काम तेज़ी, सुचारू रूप से और प्रभावी तरीके से हो सके.
ये भी पढ़ें:- चीन के एक फैसले ने ऑस्ट्रेलिया को मुश्किल में डाला, ईरान युद्ध के बीच ड्रैगन का दांव
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम मार्ग है. दुनिया के लगभग पाँचवें हिस्से का तेल और लिक्विड नैचुरल गैस इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है.
शनिवार को एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने कहा, ‘कई देश, खासकर वे जो ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर इस मार्ग को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे.’
ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध: ‘यूरोप के प्लेग्राउंड’ का बड़ा फैसला, US मिलिट्री विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस
ट्रंप ने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, साउथ कोरिया और यूके जैसे देश भी इस क्षेत्र में अपने नौसैनिक संसाधन भेजेंगे. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिमी देश पूर्वी भूमध्यसागर में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहे हैं. अमेरिका ने अपने वॉरशिप यूएसएस त्रिपोली को 2500 मरीन कमांडो के साथ रवाना किया है.
