Sunita Williams: 7 महीने से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसी सुनीता विलियम्स का क्या हो गया हाल, चलना भी भूल गईं, देखें VIDEO

Sunita Williams: भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स पिछले 7 महीने से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसी हुई हैं. उनके साथ बुच विल्मोर भी फंसे हैं. NASA दोनों को वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है.

Sunita Williams: पिछले 8 महीने से अंतरिक्ष स्टेशन में फंसी भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने बताया है कि वो अब चलना भी भूल गई हैं. उन्होंने बताया, वो चलना और बैठने की क्रिया भूल चुकी हैं. हाल ही में नीडहम हाई स्कूल के छात्रों के साथ बातचीत में सुनिता विलियम्स ने कहा, “मैं इतने दिनों से यहां हूं, मुझे याद करना भी मुश्किल हो रहा है कि चलना कैसा महसूस होता है. मैं महीनों से न तो बैठी हूं और न ही चली हूं. यहां ऐसा करने की जरूरत ही नहीं होता, बस आंखें बंद कर सकते हैं और जहां हैं, वहीं तैर सकते हैं.”

सुनीता और बुच विल्मोर अंतरिक्ष में चहलकदमी करते आए नजर

NASA ने अपने आधिकारिक एक्स पर एक वीडियो गुरुवार को शेयर किया, जिसमें सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर स्पेश वॉक करते नजर आ रहे हैं. अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार दोनों रखरखाव के काम करने और स्टेशन के बाहरी हिस्से को साफ करने बाहर निकले थे.

सुनीता विलियम और बुच की वापसी के लिए प्रयास तेज

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पिछले साल जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर पर सवार होकर आईएसएस पहुंचे थे. दोनों को अंतरिक्ष स्टेशन में केवल 8 दिन बिताने थे, लेकिन यान में तकनीकी खराबी के कारण दोनों स्पेश स्टेशन में ही फंस गए. अब नासा फिर से दोनों को वापस लाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अरबपति एलन मस्क से इस बारे में बात भी की थी. जिसके बाद नासा ने बताया कि वह एलन मस्क की स्पेसएक्स के साथ मिलकर सुनीता और बुच को वापस लाने के लिए काम कर रहा है. नासा ने एक्स पर पोस्ट किया और बताया, नासा और स्पेसएक्स क्रू-9 अंतरिक्ष यात्रियों सुनी विलियम्स और बुच विल्मोर को यथाशीघ्र सुरक्षित वापस लाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. साथ ही वे क्रू-10 के प्रक्षेपण की तैयारी भी कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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