परमाणु हथियारों की पाबंदी खत्म: अमेरिका-रूस में छिड़ेगी नई जंग? जानिए क्या है न्यू स्टार्ट संधि

Nuclear Arms Race: परमाणु महाशक्तियों के बीच 'New START' संधि खत्म होने से अब दुनिया बिना किसी पाबंदी वाले दौर में पहुंच गई है. पुतिन और ट्रंप के कड़े रुख के बीच, रूस ने चेतावनी दी है कि डूम्सडे क्लॉक तेजी से टिक-टिक कर रही है. क्या अब रूस और अमेरिका बेहिसाब परमाणु बम बनाएंगे?

Nuclear Arms Race: दुनिया के लिए आज का दिन काफी टेंशन वाला है. अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) को कंट्रोल करने वाली आखिरी बड़ी संधि, जिसे ‘New START’ कहा जाता है, आज यानी 5 फरवरी को खत्म हो रही है. इस संधि के खत्म होने का मतलब है कि अब दुनिया की इन दो सबसे बड़ी ताकतों पर हथियार बनाने या तैनात करने की कोई कानूनी पाबंदी नहीं रहेगी.

क्या है ‘New START’ संधि और क्यों था यह जरूरी?

साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के दमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे.

हथियारों पर कैप: इसके तहत दोनों देशों के लिए तैनात परमाणु वारहेड्स की संख्या 1,550 तय की गई थी.

जांच-पड़ताल: दोनों देशों को एक-दूसरे को अपने हथियारों की जानकारी देनी होती थी और शॉर्ट नोटिस पर इंस्पेक्शन (ऑन-साइट जांच) की भी इजाजत थी.

बराबरी का दर्जा: इस संधि ने मॉस्को (रूस) को अमेरिका के बराबर परमाणु महाशक्ति का दर्जा दिया था. 2021 में जो बाइडन ने इसे 5 साल के लिए बढ़ाया था, जो आज खत्म हो रहा है.

ट्रंप और पुतिन का रुख: क्यों नहीं बढ़ी बात?

यूक्रेन युद्ध के चलते तनाव इतना बढ़ गया है कि दोनों पक्ष इसे आगे बढ़ाने को लेकर पीछे हट गए हैं.

ट्रंप का विजन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर यह खत्म होती है, तो होने दें, वे इससे भी बेहतर एग्रीमेंट करेंगे. ट्रंप चाहते हैं कि अब किसी भी नई डील में चीन को भी शामिल किया जाए, जो दुनिया की तीसरी बड़ी परमाणु शक्ति बन चुका है. हालांकि, चीन इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा.

रूस की शर्त: रूस का कहना है कि अब किसी भी नई डील में यूरोप की परमाणु शक्तियों फ्रांस और ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए.

दमित्री मेदवेदेव की चेतावनी

रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने रॉयटर्स और टास (TASS) को दिए इंटरव्यू में गंभीर चेतावनी दी है.

डूम्सडे क्लॉक: उन्होंने कहा कि इस संधि के खत्म होने से ‘कयामत की घड़ी’ (Doomsday Clock) की सुइयां और तेज चलने लगेंगी, जो इंसानियत के खात्मे का संकेत देती हैं.

खतरा बढ़ा: मेदवेदेव के अनुसार, हालांकि इससे तुरंत परमाणु युद्ध नहीं छिड़ेगा, लेकिन यह पूरी दुनिया के लिए अलार्मिंग (चिंताजनक) स्थिति है. उन्होंने यूरोपीय नेताओं को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि वे रूस को कमजोर करने के चक्कर में अपनी ही अर्थव्यवस्था बर्बाद कर रहे हैं.

दुनिया पर क्या होगा असर?  

दुनियाभर के परमाणु हथियारों का 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका और रूस के पास है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि पिछले 50 सालों में पहली बार हम ऐसी दुनिया में होंगे जहां सुपरपावर्स के हथियारों पर कोई बाइंडिंग लिमिट (कानूनी रोक) नहीं है.

NPT पर खतरा: 1970 की परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की नींव कमजोर हो सकती है. अगर बड़े देश हथियार बढ़ाएंगे, तो बिना परमाणु हथियार वाले देश भी खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे और हथियारों की रेस शुरू हो जाएगी.

नई टेक्नोलॉजी: रूस ने पहले ही ‘पोसिडोन’ (सुपर टॉरपीडो) और ‘ब्यूरेवेस्टनिक’ (क्रूज मिसाइल) जैसी खतरनाक मिसाइलों का टेस्ट कर लिया है. वहीं, ट्रंप उत्तरी अमेरिका को बचाने के लिए ‘गोल्डन डोम’ (मिसाइल डिफेंस सिस्टम) बनाने की तैयारी में हैं.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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