नेपाल में Gen-Z से घायल हुईं पार्टियां क्यों एकजुट हुईं? अपर हाउस चुनाव में करना चाहती हैं खेल!

Nepal Election Major Parties Unite for Alliance: प्रतिनिधि सभा में प्रतिनिधित्व करने वाली चार प्रमुख राजनीतिक पार्टियां 25 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय सभा चुनाव के लिए एक गठबंधन बनाने की तैयारी कर रही हैं. कांग्रेस, यूएमएल और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी 18 सीटों के बंटवारे पर एकजुट होने की तैयारी में है. इस गठबंधन में तीनों के साथ जनता समाजवादी पार्टी नेपाल भी शामिल होगी. सोमवार को नेताओं ने बैठक करके सीट बंटवारे पर बात की.

Nepal Election Major Parties Unite for Alliance: नेपाल में सितंबर 2025 में देश के युवाओं ने संविधान लागू होने के बाद से शासन कर रही सभी पार्टियों पर सारा गुस्सा निकाल दिया. आंदोलन के तहत उन्होंने न सिर्फ सरकार उखाड़ फेंकी, बल्कि नेपाल में एक क्रांति ला दी. इस आंदोलन को अब लगभग चार महीने बीतने वाले हैं और चुनाव की भी घोषणा हो गई है, ऐसे में राजनीतिक गहमागहमी भी चल निकली है. द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भंग हो चुके प्रतिनिधि सभा में प्रतिनिधित्व करने वाली चार प्रमुख राजनीतिक पार्टियां 25 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय सभा चुनाव के लिए एक गठबंधन बनाने की तैयारी कर रही हैं. नेपाल में भारत की ही तरह उच्च सदन और निम्न सदन हैं. चूंकि आंदोलन के बाद निम्न सदन पूरी तरह भंग हो गई थी, लेकिन उच्च सदन अब भी काम कर रहा था. ऐसे में इस अपर हाउस के लिए यह पार्टियां पूरी जोर शोर से जेन-जी को टक्कर देने की राह पर हैं. 

राष्ट्रीय सभा के सदस्य छह साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं.  यह प्रक्रिया राष्ट्रीय सभा के द्विवार्षिक सेवानिवृत्ति चक्र के तहत होती है. 4 मार्च को राष्ट्रीय सभा के 59 सदस्यों में से 18 सदस्य, यानी ऊपरी सदन का एक-तिहाई हिस्सा अपने कार्यकाल से सेवानिवृत्त होने वाले हैं. इन खाली होने वाली सीटों को भरने के लिए चुनाव कराए जाएंगे. चुनावी कार्यक्रम के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों को बुधवार (7 जनवरी) को नामांकन दाखिल करना होगा. इसी के लिए नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी और मधेस आधारित दलों के एक गठबंधन के बीच चुनावी रणनीति को लेकर बातचीत जारी है. 

कैसा होगा बंटवारा?

कांग्रेस, यूएमएल और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के अनुसार, बातचीत का मुख्य फोकस 18 सीटों के बंटवारे पर है. प्रस्तावित फार्मूले के तहत कांग्रेस को सात सीटें, यूएमएल को छह, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को चार और जनता समाजवादी पार्टी नेपाल को एक सीट दिए जाने की संभावना है. कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पार्टी मंगलवार तक अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप दे सकती है. पार्टी नेताओं का कहना है कि व्यापक चुनावी गठबंधन को लेकर बातचीत तेज हो गई है.

कांग्रेस ने बताया एकजुट होने पर सहमत दल

सोमवार शाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उपाध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का, रमेश लेखक और कृष्ण प्रसाद सिटौला ने यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और महासचिव शंकर पोखरेल से मुलाकात कर सीट बंटवारे पर चर्चा की. वहीं यूएमएल ने भी मंगलवार को पार्टी सचिवालय की बैठक बुलाकर अपने उम्मीदवार तय करने का फैसला किया है. कांग्रेस की केंद्रीय कार्यसम्पादन समिति की बैठक में उपाध्यक्ष खड़का ने सदस्यों को बताया कि संविधान निर्माण में शामिल राजनीतिक ताकतें राष्ट्रीय सभा चुनाव के लिए एकजुट होने पर सहमत हो गई हैं. 

कांग्रेस अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा की ओर से खड़का ने इससे पहले दिन में ओली से संयुक्त सहयोग को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत की. इस मुद्दे से जुड़े एक कांग्रेस नेता ने द पोस्ट को बताया, “कांग्रेस और यूएमएल के बीच आगामी संसदीय चुनावों के लिए गठबंधन बनाने को लेकर भी चर्चा चल रही है, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. कांग्रेस और यूएमएल के बीच चुनावी गठबंधन की संभावना पर पहले भी कई बार बातचीत हो चुकी है.”

बाद में शामिल हुई नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी

कांग्रेस के प्रवक्ता प्रकाश शरण महत ने कहा कि पार्टियां सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के करीब हैं. उन्होंने मीडिया से कहा, “अगर हम गठबंधन नहीं करते हैं, तो एक भी सीट जीतना मुश्किल होगा.” उन्होंने आगे कहा, “हम मंगलवार तक अपने उम्मीदवार तय कर लेंगे.” द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, पहले देउबा और यूएमएल अध्यक्ष ओली के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति बनी, इसके बाद नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्प कमल दहल ने दोनों नेताओं से मुलाकात कर चारों दलों के बीच समायोजन पर चर्चा की. शुरुआत में कांग्रेस और यूएमएल के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में हाल में गठित नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी, जिसमें पूर्व सीपीएन (माओवादी केंद्र) समेत कई कम्युनिस्ट दल शामिल हैं, ने भी गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई. इसके बाद ही नई बातचीत शुरू हुई.

किस पार्टी से कितने सांसद होंगे रिटायर?

संसदीय सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च में सबसे ज्यादा सेवानिवृत्त होने वाले सदस्य यूएमएल के होंगे, जिनके आठ सदस्य अपना कार्यकाल पूरा करेंगे. इसके बाद सीपीएन (माओवादी केंद्र) जो अब नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का हिस्सा है, के सात सदस्य अगले चार वर्षों में सेवानिवृत्त होंगे. इसके अलावा सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी का एक-एक सदस्य भी मार्च में सेवानिवृत्त होगा. हालांकि ऊपरी सदन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नेपाली कांग्रेस का कोई भी सदस्य उस समय सेवानिवृत्त नहीं होगा. 

कैसे होता है उच्च सदन का चुनाव?

राष्ट्रीय सभा की कुल 19 सीटों में से 18 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि एक सदस्य को सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाएगा. संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय सभा संसद का स्थायी सदन है. निचला सदन प्रतिनिधि सभा को 12 सितंबर को जेन जेड आंदोलन के बाद भंग कर दिया गया था. ऊपरी सदन के सदस्यों का चुनाव एक निर्वाचन कॉलेज द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रांतीय विधानसभा के सदस्य और स्थानीय सरकारों के मेयर, उपमेयर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल होते हैं. निर्वाचन आयोग द्वारा तय व्यवस्था के तहत प्रांतीय विधानसभा सदस्यों का मतभार 53 जबकि स्थानीय सरकार के प्रमुखों और उपप्रमुखों का मतभार 19 होता है.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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