क्या जेफ्री एपस्टीन बच्चों की बलि और नरभक्षण से जुड़ा था? जानें वायरल दावों की सच्चाई

Jeffrey Epstein cannibalism claims: जेफ्री एपस्टीन की 30 लाख फाइलों के लीक होने से पूरी दुनिया हैरान है. क्या वाकई रसूखदार (प्रभावशाली) लोग बच्चों की बलि और नरभक्षण जैसे घिनौने कामों में शामिल थे? जानें वायरल 'क्रीम चीज' मैसेज का सच, एफबीआई के गुप्त दस्तावेजों के दावे और इस पूरे केस में रूसी जासूसी का चौंकाने वाला कनेक्शन.

Jeffrey Epstein cannibalism claims: यौन स्कैंडल के आरोपी जेफ्री एपस्टीन (जिसकी 2019 में जेल में मौत हो गई थी) से जुड़ी 30 लाख से ज्यादा फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद इंटरनेट पर हलचल मच गई है. इन सरकारी दस्तावेजों के बाहर आने के बाद लोग कई डराने वाले दावे कर रहे हैं, जैसे इंसानों को खाना (नरभक्षण) और बच्चों की बलि देना. आइए जानते हैं कि इन दावों के पीछे की असलियत क्या है.

कैसे शुरू हुआ यह विवाद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्याय विभाग (DOJ) को एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की इजाजत दी थी. 30 जनवरी को जैसे ही ये रिकॉर्ड्स सामने आए, सोशल मीडिया पर दावों की बाढ़ आ गई. लोग फाइलों से छोटी-छोटी बातें और ईमेल के हिस्से निकालकर यह कहने लगे कि एपस्टीन और उसके दोस्त बच्चों को मारते और खाते थे.

‘क्रीम चीज’ और ‘बेबी’ वाले ईमेल का रहस्य

इंटरनेट पर एक मैसेज बहुत वायरल हो रहा है जो कथित तौर पर एपस्टीन का है. इसमें लिखा है कि करोड़ों बच्चे हैं, लेकिन अच्छी वेजिटेबल क्रीम चीज बहुत कम है. एक अन्य मैसेज में लिखा है कि मुझे नहीं पता कि क्रीम चीज और बेबी एक ही लेवल पर हैं क्या.

कहा जा रहा है कि यह बातचीत एपस्टीन और ‘नादिया’ नाम की महिला के बीच हुई थी (अनुमान है कि यह उसकी पायलट नादिया मार्सिंको है, जो 2024 से लापता है). हालांकि, फाइलों में ‘क्रीम चीज’ शब्द का इस्तेमाल कई जगह खाने-पीने और इवेंट प्लानिंग के लिए हुआ है. यह स्पष्ट नहीं है कि यहां ‘बेबी’ शब्द का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स इसे नरभक्षण (Cannibalism) से जोड़कर देख रहे हैं.

2009 का वो पुराना वीडियो फिर हुआ वायरल

इन दावों के बीच एक पुराना वीडियो भी चर्चा में आ गया है. 2009 में गैब्रिएला रिको जिमेनेज नाम की एक मॉडल को मेक्सिको में चिल्लाते हुए देखा गया था. वह आरोप लगा रही थी कि अमीर और ताकतवर लोग इंसानों को खाते हैं और उनकी बलि देते हैं. अब लोग इस वीडियो को एपस्टीन की फाइलों से जोड़कर देख रहे हैं.

फैक्ट-चेक: क्या कहते हैं सरकारी दस्तावेज?

फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘स्नोप्स’ (Snopes) ने इन फाइलों की बारीकी से जांच की है. स्नोप्स के अनुसार:

  • फाइलों में ‘Cannibal’ (नरभक्षक) शब्द 52 बार और ‘Cannibalism’ 6 बार आया है.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइलों में ऐसे दावे तो मौजूद हैं, लेकिन उनकी सच्चाई साबित नहीं हुई है.
  • ये दावे मुख्य रूप से 2019 में एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा एफबीआई (FBI) को दिए गए इंटरव्यू पर आधारित हैं.

रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने दावा किया कि साल 2000 में एपस्टीन की नाव (यॉट) पर उसने भयानक चीजें देखीं. उसने आरोप लगाया कि उसे एक रस्म के तहत चोट पहुंचाई गई. उसने अपनी आंखों से बच्चों के शरीर के अंगों को अलग करते देखा.

उसने दावा किया कि वहां लोगों को बेहद गंदगी भरी चीजें खाने पर मजबूर किया गया. नोट: न्याय विभाग (DOJ) के रिकॉर्ड बताते हैं कि उस व्यक्ति ने इन दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया.

रूस और जासूसी का एंगल

हाल ही में रूस ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि एपस्टीन रूसी खुफिया एजेंसी का एजेंट था. रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे समय की बर्बादी बताया. दूसरी ओर, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने एक टीम बनाई है जो इस बात की जांच करेगी कि क्या इस पूरे कांड के पीछे रूसी जासूसों का हाथ था. 

उनका मानना है कि रूसी खुफिया एजेंसी के पास कई बड़े नेताओं की ऐसी जानकारी हो सकती है जिससे उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके. सालों से यह चर्चा रही है कि एपस्टीन के संबंध विदेशी खुफिया एजेंसियों से थे. कुछ लोग उसे इजरायली जासूसी से जोड़ते हैं, तो कुछ फाइलों के अनुसार एपस्टीन ने खुद दावा किया था कि उसने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में रूसी अधिकारियों को जानकारी दी थी.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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