Israel Hamas War : भूख से मरेंगे गाजा के लोग! इजरायल ने लिया कड़ा फैसला

Israel Hamas War : इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा समझौतों के तहत इजराइल पहले चरण के बाद लड़ाई फिर से शुरू कर सकता है. सीजफायर तभी जारी रहेगा जब हमास बंधकों को रिहा करना जारी रखेगा.

Israel Hamas War :इजरायल ने गाजा में मानवीय सहायता रोक दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि हमास के साथ छह सप्ताह का सीजफायर रविवार को समाप्त हो चुका है. ईरान समर्थित फिलिस्तीनी गुट ने सीजफायर को बढ़ाने के अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिससे तनाव बढ़ गया है.सीजफायर को बढ़ाने के प्रयासों में एक प्रमुख मीडिएटर मिस्र ने इजरायल के फैसले की कड़ी आलोचना की.

भुखमरी को हथियार नहीं बनाना चाहिए : मिस्र

मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सहायता बंद नहीं की जानी चाहिए थी. वहां के लोगों को ये दंड देने के समान है. भुखमरी को हथियार नहीं बनाना चाहिए. सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी इस कदम की निंदा की और इसे ब्लैकमेलिंग करार दिया. उसने कहा कि ऐसा करके सामूहिक दंड दिया जा रहा है.

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इजराइल ने गाजा पट्टी में राहत सामग्री रोकी

इजराइल ने रविवार को गाजा पट्टी में सभी वस्तुओं और रसद का प्रवेश रोक दिया. उसने चेतावनी दी कि यदि हमास सीजफायर को बढ़ाने संबंधी नए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हमास ने इजराइल पर सीजफायर समझौते को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उसने कहा कि सहायता पर रोक संबंधी उसका फैसला ‘‘युद्ध अपराध और समझौते (सीजफायर) पर हमला है.’’ यह समझौता जनवरी में हुआ था.

इजराइल अमेरिका के साथ

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ है. वर्तमान समझौतों के तहत इजराइल पहले चरण के बाद लड़ाई फिर से शुरू कर सकता है. इजराइल के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि सहायता निलंबित करने का निर्णय ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद लिया गया है.

प्रस्ताव के तहत आधे बंधकों को रिहा करने की बात

नेतन्याहू के कार्यालय के अनुसार, प्रस्ताव के तहत आधे बंधकों को, चाहे वे जीवित हों या मृत, पहले दिन छोड़ा जाएगा. अगर स्थायी सीजफायर पर सहमति बन जाती है तो बाकी को रिहा कर दिया जाएगा. इजराइल द्वारा घोषित प्रस्ताव या सहायता बंद करने के उसके निर्णय पर अमेरिका की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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